ग्रीनलैंड लेकर ही रहेंगे! उसके लिए मिलिट्री तैयार… ट्रंप की नई जिद पर व्हाइट हाउस की मुह

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षा रुकने का नाम नहीं ले रही. वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाकर अमेरिकी कंट्रोल स्थापित करने के ठीक बाद अब ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर है. व्हाइट हाउस ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे ऊपर की प्राथमिकता है. इसके लिए सेना का इस्तेमाल भी एक विकल्प है. इसका यूरोपीय देशों और NATO ने कड़ा विरोध जताया, इसे गठबंधन के लिए खतरा बताया है. समझते हैं पूरी खबर.

व्हाइट हाउस ने क्या कहा?
व्हाइट हाउस ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड को हासिल करना संयुक्त राज्य अमेरिका की “राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता” है. इस बयान के बाद डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन दोनों ही दलों के नेताओं ने चिंता जताई है कि ऐसी भाषा से NATO और वैश्विक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप स्पष्ट कर चुके हैं कि ग्रीनलैंड को हासिल करना अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी प्रायोरिटी है. आर्कटिक क्षेत्र में हमारे विरोधियों को रोकना बेहद जरूरी है.” उन्होंने आगे कहा, “राष्ट्रपति और उनकी टीम इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. बेशक, अमेरिकी सेना का इस्तेमाल करना कमांडर-इन-चीफ के पास हमेशा एक विकल्प होता है.”

सांसद कर रहे विरोध
लेविट के इन बयानों ने सांसदों की आलोचना को और तेज कर दिया. उनका कहना है कि ग्रीनलैंड जो डेनमार्क साम्राज्य का स्वायत्त हिस्सा है के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई की बात करना भी अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण सहयोगियों में से एक को कमजोर कर सकता है. ये बयान वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद आया है, जहां अमेरिकी फोर्सेस ने मादुरो को पकड़ लिया और देश पर कंट्रोल की बात कही. ट्रंप बोले, “हमें ग्रीनलैंड की सख्त जरूरत है.”

ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी अनावश्यक और खतरनाक
यूटा के रिपब्लिकन सांसद ब्लेक मूर और मैरीलैंड के डेमोक्रेट स्टेनी एच. होयर, जो ‘कांग्रेसनल फ्रेंड्स ऑफ डेनमार्क कॉकस’ के को-चेयर हैं उन्होंने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात करना अनावश्यक और खतरनाक है. उनका मानना है कि डेनमार्क NATO का सहयोगी है और अमेरिका के सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक है. ग्रीनलैंड पर हमला जो इस गठबंधन का अहम हिस्सा है दरअसल NATO पर हमला होगा. सांसदों ने बताया कि डेनमार्क लंबे समय से आर्कटिक सुरक्षा पर अमेरिका के साथ काम करता आया है. बयान में कहा गया, “वे दशकों से ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने के हर अनुरोध को स्वीकार करते आए हैं, और रूस व चीन को रोकने में मदद के लिए GDP का 3.3% रक्षा पर खर्च कर रहे हैं.” मूर और होयर ने यह दावा भी खारिज कर दिया कि सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की जरूरत है. उन्होंने कहा, “अगर संदेश यह है कि ‘हमें ग्रीनलैंड चाहिए’, तो सच यह है कि ग्रीनलैंड से हमें जो भी चाहिए, वह पहले से ही हमारे पास उपलब्ध है.”

यूरोप और NATO क्यों गुस्से में?ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वशासी इलाका है और NATO का हिस्सा. यूरोपीय लीडर्स ने एकजुट होकर विरोध किया. फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली, पोलैंड, स्पेन और डेनमार्क के नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा, “ग्रीनलैंड उनके लोगों का है. इसका फैसला सिर्फ डेनमार्क और ग्रीनलैंड करेगा. आर्कटिक की सुरक्षा NATO के साथ मिलकर करनी है.” डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी कि ग्रीनलैंड पर हमला NATO का अंत होगा. यूरोपीय देशों का कहना है कि अमेरिका पहले से ही वहां बेस इस्तेमाल कर रहा है, पूरा कब्जा करने की क्या जरूरत?

ग्रीनलैंड इतना खास क्यों?
आर्कटिक में बर्फ पिघलने से नए शिपिंग रूट खुल रहे हैं और दुर्लभ मिनरल्स मिल रहे हैं. रूस-चीन वहां सक्रिय हैं. अमेरिका का पहले से थुले एयर बेस है, जो मिसाइल डिफेंस और निगरानी के लिए अहम. ट्रंप का मानना है कि पूरा कंट्रोल अमेरिका के पास होना चाहिए, ताकि सुरक्षा मजबूत हो. लेकिन ग्रीनलैंड के लोग और डेनमार्क कह रहे हैं कि हम पहले से सहयोग कर रहे हैं, जोड़ने की जरूरत नहीं है. ट्रंप के सहयोगी स्टीफन मिलर ने तो कहा कि कोई अमेरिका से लड़ाई नहीं करेगा ग्रीनलैंड के लिए.

दुनिया पर क्या असर?
ये विवाद NATO में दरार डाल सकता है. अमेरिकी सांसदों में भी चिंता है कि अनावश्यक तनाव बढ़ रहा है. ट्रंप की ये नीति वेनेजुएला के बाद और आक्रामक हो गई है. दुनिया सांस थामे देख रही है कि ट्रंप का अगला कदम क्या होगा. ट्रंप अब ग्रीनलैंड को खरीदेंगे, दबाव डालेंगे या कुछ और? अगर ऐसा हुआ तो अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बड़ा उलटफेर हो सकता है. फिलहाल तनाव चरम पर है.