आपको याद होगा जब बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा हुई थी, उससे पहले और बाद में कांग्रेस पार्टी जोरशोर से ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उछाल रही थी. ग्रैंड ओल्ड पार्टी ने भाजपा के साथ-साथ चुनाव आयोग पर भी गंभीर सवाल उठाए. राहुल गांधी ने हजारों पन्ने ले आकर बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रजेंटेशन दिया था. बाद में वोटिंग में क्या हुआ, नतीजे में दिखा. कांग्रेस 61 में से केवल 6 सीटें जीत सकी. महागठबंधन का शो फ्लॉप साबित हुआ. अब कांग्रेस की इंटरनल मीटिंग में पार्टी के नेताओं ने ही राहुल गांधी की ओर से खूब उछाले गए ‘वोट चोरी’ पर ही सवाल उठाए हैं. हां, पार्टी नेताओं ने हार के कारण गिनाते हुए कहा कि हमने कुछ ज्यादा ही ‘वोट चोरी’ पर फोकस कर दिया.
उनका शायद इशारा इस बात की ओर था कि हमने वोट चोरी की चर्चा ज्यादा की और चुनाव प्रचार को ठीक से मैनेज नहीं कर पाए. महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को सीएम प्रोजेक्ट किया था. लोगों को इस गठबंधन की तुलना में एनडीए की घोषणाएं ज्यादा भरोसेमंद लगीं. कुछ सीनियर नेताओं ने पार्टी लीडरशिप के सामने बिहार में पराजय के तीन प्रमुख कारण गिनाए हैं.
1. कुछ सीनियर नेताओं ने बिहार में कांग्रेस की हार का कारण गिनाते हुए कहा कि हमने महंगाई, माइग्रेशन और करप्शन जैसे जरूरी मुद्दों की जगह SIR / वोट चोरी पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया. उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से कहा कि अगर पार्टी राज्य में खुद को फिर से खड़ा करने के लिए गंभीर है तो हार के लिए जवाबदेही तय की जाए.
2. बिहार के कुछ बड़े नेताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान महिलाओं को सरकार की तरफ से 10,000 रुपये दिया जाना सबसे ज्यादा गेमचेंजर रहा. इसने पूरा नरैटिव ही बदल दिया.
3. इसके अलावा बूथ मैनिपुलेशन और पार्टनर्स के बीच तालमेल की कमी को हार की बड़ी वजह बताई गई. AIMIM यानी असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी को सीमांचल और दूसरे इलाकों में अल्पसंख्यक वोटों के बंटवारे के लिए जिम्मेदार ठहराया गया.
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया कि BJP ने चुनावों को ‘फिक्स’ करने के लिए ‘बहुत सारे टूल्स’ का इस्तेमाल किया, जिसमें SIR, EVM, वोट खरीदना और विपक्षी उम्मीदवारों के खिलाफ प्रशासन का इस्तेमाल शामिल था. बिहार में हार के कुछ दिनों बाद कांग्रेस के बड़े नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल ने उम्मीदवारों और सांसदों के साथ खराब प्रदर्शन की समीक्षा की. बताते हैं कि मीटिंग में राहुल गांधी ने कहा कि मैं भी बराबर जिम्मेदार हूं.
अलग-अलग बैच में करीब 70 नेता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिले. मीटिंग शुरू होने और टॉप नेताओं के आने से पहले, हारे हुए दो उम्मीदवारों के बीच हार के कारणों को लेकर कहासुनी भी हुई. एक ने इस बात पर एतराज जताया कि दूसरा पार्टी टिकट पाने वाले ‘बाहरी लोगों’ के खिलाफ हिंसा की वकालत कर रहा है.
कुछ लोगों ने एक नेता के कैंडिडेट चुनने के तरीके में गलती ढूंढी. कहा गया कि इससे पार्टी को भारी नुकसान हुआ. एक तरफ भाजपा ने हिंदी भाषी राज्यों से नेताओं की फौज लाकर बिहार चुनाव में कई महीने पहले लगा दी थी. इधर कांग्रेस ने कर्नाटक के कृष्णा अल्लावरू को प्रभारी बनाया था, जिन पर बाद में गंभीर आरोप लगे और चुनाव के बीच में उन्हें हटाने की खबर आई.
बताया जा रहा है कि बिहार के नेताओं ने राहुल गांधी से कहा कि जैसे उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी प्रेसिडेंट का पद छोड़ दिया था, वैसे ही राज्य में इस्तीफे होने चाहिए.
आरजेडी से गठबंधन पर भी निशाना
हां, कांग्रेस के कुछ नेताओं ने कहा कि हमारा यह सहयोगी कुछ वोट लाता है लेकिन दूसरे समुदायों को भी बांटता है. यह भी मांग की गई कि कांग्रेस RJD के साथ गठबंधन तोड़ दे. हालांकि एक ग्रुप मीटिंग में राहुल ने यह पूछकर इसे खारिज कर दिया कि पार्टी उन सीटों पर क्यों फेल हो गई जहां कांग्रेस और RJD एक-दूसरे के खिलाफ फ्रेंडली फाइट में थे.