तेहरान: अमेरिका और ईरान में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक छोटा सा द्वीप ग्रेट टुनब टकराव का नया केंद्र बन गया है। इस अहम रणनीतिक द्वीप पर सभी का ध्यान तब गया, जब अमेरिकी सेना ने बुधवार को किए गए हमलों में इसे निशाना बनाया। अमेरिकी सेना का यह कदम इसलिए भी असामान्य था क्योंकि आमतौर पर रात में होने वाले हमलों की जगह इस द्वीप को दिन में निशाना बनाया गया। यहां अमेरिकी सेना ने 90 मिनट तक बमबारी की। जानकारों का कहना है कि यह अमेरिका की दुनिया के सबसे अहम समुद्री चोकपॉइंट पर अपना नियंत्रण करने की सोची-समझी कोशिश है।
ईरान का ‘अंडमान निकोबार’
ईरान का ग्रेटर टुनब आइलैंड उन कई द्वीपों में से एक है, जिसे रक्षा विशेषज्ञ होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों और नौसैनिक पोतों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बताते है। इसकी तुलना भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से की जाती है। अंडमान की तरह ही इसे ईरान का कभी न डूबने वाला एयरक्राफ्ट करियर कहा जाता है।
UAE के साथ द्वीप पर क्षेत्रीय विवाद
ग्रेटर टुनब उन तीन अमीराती द्वीपों में शामिल हैं, जिन पर ईरान ने 1971 में कब्जा कर लिया था। बाकी दो द्वीप लेसर टुनब और अबू मूसा हैं। UAE इन द्वीपों पर अपना दावा करता है। ग्रेटर टुनब आइलैंड पर ईरान का एक मिलिट्री एयरफील्ड, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का नेवल बेस, सैन्य छावनियां और मिसाइलें मौजूद हैं। इसका इस्तेमाल आस-पास के शिपिंग रूट पर नजर रखने के लिए किया जाता है।
होर्मुज पर कंट्रोल के लिए बहुत अहम
सऊदी मीडिया आउटलेट अशराक अल अवसात की रिपोर्ट के अनुसार, IRGC नेवी के पूर्व कमांडर अलीरेजा तंगसिरी ने इस द्वीप को होर्मुज पर ईरान के नियंत्रण के लिए बहुत अहम बताया था। तंगसिरी इसी साल अमेरिका-इजरायल से युद्ध के दौरान 26 मार्च को बंदर अब्बास में हुए एक हवाई हमले में मारे गए थे। ईरान के सरकारी टीवी को दिए गए एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि ग्रेटर टुनब को खोने का मतलब होगा, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले रूट पर नियंत्रण खो देना।
अमेरिका की इन द्वीपों पर नजर
विश्लेषकों का कहना है कि अगर अमेरिका इन द्वीपों पर कब्जा करता है तो उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण मिल सकता है। चीन की सुन यात-सेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ग्रेटर टुनब और छह दूसरे द्वीपों- अबू मूसा, लेसर टुनब, हेंगाम, केशम, लराक और होर्मुज- को इस चोकपॉइंट में ईरान की मुख्य रक्षा पंक्ति बताया है। उन्होंने इलाके में मौजूद छह द्वीपों को तेहरान का स्थिर और न डूबने वाला एयरक्राफ्ट करियर बताया है, क्योंकि यहां एंटी शिप मिसाइलें, निगरानी चौकियां और नौसैनिक बेस मौजूद हैं।
ग्रेटर टुनब का महत्व दो मुख्य शिपिंग रूट के पास होने की वजह से भी है। दूसरा रूट दक्षिण में ओमान के तट के साथ है जिस पर अमेरिका जोर दे रहा है। ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर तेहरान की व्यवस्था लागू होगी, जिसमें ओमान को भी शामिल करने की बात कही है। वहीं, अमेरिका का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जिस पर परमिट या शुल्क नहीं लगाया जा सकता।
अंडमान है कभी न डूबने वाला एयरक्राफ्ट करियर
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को अक्सर भारत का कभी न डूबने वाला एयरक्राफ्ट करियर कहा जाता है। बंगाल की खाड़ी में 750 किलोमीटर से ज्यादा इलाके में फैले इन द्वीपों पर ही भारत का सबसे दक्षिणी पॉइंट है। दुनिया के अहम व्यापारिक जलमार्ग मलक्का स्ट्रेट (Strait of Malacca) से इसकी नजदीकी भारत को एक रणनीतिक बढ़त प्रदान करती है। इससे भारत को दुनिया के अहम रास्तों पर नजर रखने, समु्द्री संचार लाइनों को नियंत्रित करने और चीन की नौसेना के विस्तार के खिलाफ एक स्थायी भू-राजनीतिक रोक बनाने में मदद करती है। ये द्वीप समूह स्थिर जमीन वाले हैं, जिसका मतलब है इन्हें डुबोया नहीं जा सकता। यह इसे एक आदर्श स्थायी सैन्य बेस बनाता है। यहां भारत का त्रिस्तरीय सैन्य कमांड है।