इथेनॉल पर इंडस्ट्री एक्सपर्ट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने शुरुआती संबोधन में विशेषज्ञ वर्तिका शुक्ला ने कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला रातोंरात नहीं लिया गया है. ये एक सुनियोजित, वैज्ञानिक आधार पर और चरणबद्ध तरीके से लागू की गई प्रक्रिया है. वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में केवल लगभग 1.5% इथेनॉल मिलाया जाता था. इसके बाद E20 यानी 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय किया गया. इसे दिसंबर 2025 तक निर्धारित समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया गया.
कार्बन उत्सर्जन को कम करना है लक्ष्य
खासकर 2018 में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को एक व्यवस्थित तरीके से सभी शेयर होल्डर के साथ चर्चा और विचार-विमर्श के लिए प्रस्तुत किया गया. ये कार्यक्रम वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित है. ऑटोमोबाइल निर्माताओं, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया और सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स जैसी संस्थाओं द्वारा व्यापक परीक्षण किए गए हैं, साथ ही ये वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है. इनका उद्देश्य जीवाश्म ईंधनों को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाना और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है.
‘परीक्षण के बाद ही E20 को अपनाने का फैसला किया’
भारत में E20 पेट्रोल को व्यापक और सख्त परीक्षणों के बाद ही आधिकारिक स्वीकृति दी गई है. इस विषय पर मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने बताया कि कंपनी ने 2023 से पहले E10 ईंधन पर भी इंजन की विस्तृत टेस्टिंग की थी और उस दौरान किसी तरह की तकनीकी समस्या सामने नहीं आई. उनका कहना है कि ऑटोमोबाइल उद्योग ने लंबे समय तक परीक्षण और विभिन्न प्रयोगों के बाद ही E20 को अपनाने का फैसला किया. E20 के लागू होने के बाद भी ग्राहकों की ओर से किसी विशेष समस्या की रिपोर्ट नहीं मिली है.
हीरो मोटोकॉर्प के आशुतोष वर्मा ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि कंपनी हर साल करोड़ों बाइकों की सर्विसिंग करती है. लेकिन, E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से जुड़ी कोई समस्या अब तक सामने नहीं आई है.