21 हजार फॉलोअर्स, मंत्री-अधिकारी से संबंध… किसने की महंत देवानंद की हत्या?

Kota News: राजस्थान के कोटा स्थित चंद्रसेल मठ के महंत देवानंद महाराज की नृशंस हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है. एक ऐसे संत, जिनकी पहुंच सियासी दिग्गजों से लेकर शीर्ष अधिकारियों तक थी, उनकी निर्मम हत्या कई गहरे सवाल खड़े कर रही है. इस मर्डर मिस्ट्री का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि दो साल पहले जिस पुलिस अधिकारी ने महंत से आशीर्वाद लिया था, आज वही अफसर उनके कातिलों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए दिन-रात एक कर रहा है.

रसूख ऐसा कि बड़े-बड़े नेता और मंत्री लेते थे आशीर्वाद
महंत देवानंद महाराज सिर्फ एक आध्यात्मिक गुरु नहीं थे, बल्कि समाज और प्रदेश की राजनीति में उनका गहरा प्रभाव था. उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल इस बात की गवाही देती है कि उनके दरबार में प्रदेश के कई दिग्गज शीश नवाते थे. महाशिवरात्रि के मौके पर लोकसभा अध्यक्ष व कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला भी चंद्रसेल मठ पहुंचे थे और महंत देवानंद का आशीर्वाद लिया था. उनके अकाउंट पर कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, विधायक कल्पना देवी, पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत और प्रहलाद गुंजल जैसे प्रमुख चेहरों के साथ तस्वीरें मौजूद हैं. जहां पहले उनके पेज पर आध्यात्मिक विचार और धार्मिक आयोजनों की तस्वीरें पोस्ट होती थीं, वहीं अब 21 हजार फॉलोअर्स वाला यह पेज श्रद्धांजलियों और संवेदनाओं से भर गया है.

जिस पुलिस अफसर ने लिया आशीर्वाद, वही ढूंढ रहा कातिल
इस हत्याकांड की जांच में एक ऐसा संयोग सामने आया है, जो किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है. करीब दो साल पहले, एक पुलिस अधिकारी की तस्वीर महंत देवानंद महाराज के सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई थी, जिसमें वह संत से आशीर्वाद ले रहे थे. आज वही अधिकारी कोटा के जवाहर नगर थाने में सीआई (CI) के पद पर तैनात हैं और उस पुलिस टीम का अहम हिस्सा हैं, जो महंत के हत्यारों की तलाश में जुटी है. एक ‘शिष्य’ के रूप में आशीर्वाद लेने वाले इस अफसर के कंधों पर अब अपने गुरुतुल्य संत के कातिलों को बेनकाब करने की भारी जिम्मेदारी है.

सिर्फ दो दिन पहले पहुंचे थे मठ, फिर कैसे रची गई साजिश?
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, महंत देवानंद को करीब चार साल पहले चंद्रसेल मठ की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. हालांकि, वे अपना ज्यादातर समय सवाई माधोपुर स्थित अपने दूसरे आश्रम की व्यवस्थाओं को संभालने में बिताते थे. वे महीने में अमूमन एक या दो दिन ही चंद्रसेल मठ आते थे, या फिर किसी विशेष धार्मिक आयोजन के समय यहां रुकते थे. इस बार भी वे अपनी हत्या से महज दो दिन पहले ही मठ पहुंचे थे. इसी दौरान अज्ञात हमलावरों ने उन पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर उनकी हत्या कर दी. कातिलों को उनके आने की सटीक जानकारी कैसे मिली, यह पुलिस की जांच का एक बड़ा और अहम बिंदु है.

कोटा से सवाई माधोपुर तक 100 किमी के दायरे में जांच
इतने हाई-प्रोफाइल संत की हत्या के कारणों को लेकर अब तक कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आ पाई है. हत्यारों का सुराग लगाने के लिए पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी है और कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं. पुलिस ने जांच का दायरा 100 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र तक बढ़ा दिया है. चूंकि महंत सवाई माधोपुर के आश्रम से भी गहराई से जुड़े थे, इसलिए पुलिस वहां के संपर्कों, विवादों और अन्य पहलुओं को भी खंगाल रही है ताकि हत्या की असली वजह तक पहुंचा जा सके.

श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश, कठोर सजा की मांग
महंत की अचानक और निर्मम हत्या के बाद से उनके अनुयायियों में भारी रोष है. विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया है. श्रद्धालु जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं. फिलहाल, पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि इस हत्याकांड के पीछे आखिर कौन सा मास्टरमाइंड छिपा है.