Rajasthan High Court on SC-ST Act: हाईकोर्ट ने केस की सुनवाई में क्या क्या कहा? (Source: Indian Express File Photo) Rajasthan High Court on SC-ST Act: राजस्थान हाईकोर्ट ने एससी एस्टी एक्ट से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है और आईआईटी जोधपुर के निदशक के साथ ही एक एसोसिएट प्रोफेसर के बीच विवाद का अंत कर दिया। कोर्ट की तरफ से कहा गया कि “नीच” शब्द का प्रयोग अपने आप में जाति-आधारित भेदभाव नहीं माना जा सकता है, और न ही इसे जातिसूचक गाली माना जा सकता है।
दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप शाह की सिंगल बेंच ने जोधपुर के डॉ. दीपक अरोरा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया।
अन्य धाराओं पर चलता रहेगा
राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा ये आदेश शनिवार को पारित किया गया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि एसोसिएट प्रोफेसर के खिलाफ अन्य लागू धाराओं के तहत पुलिस जांच जारी रहेगी। बता दें कि यह मामला 2 सितंबर, 2025 का है, जब आईआईटी जोधपुर के कार्यवाहक रजिस्ट्रार अंकुर गुप्ता ने करवाड़ पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।
इस मामले में शिकायत के अनुसार एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपक अरोरा अपने कार्यालय में संस्थान के निदेशक प्रोफेसर अविनाश अग्रवाल के साथ चर्चा कर रहे थे, तभी दोनों के बीच बहस छिड़ गई।
क्या है पूरा मामला?
आरोप है कि कहासुनी के दौरान डॉ. अरोरा ने निदेशक पर हमला किया। जब कार्यालय सहायक विवेक गौतम और घटनास्थल पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने हस्तक्षेप करने का प्रयास किया, तो डॉ. अरोरा ने कथित तौर पर विवेक गौतम पर भी शारीरिक हमला किया।
केस की एफआईआर में आगे कहा गया है कि घटना के दौरान उन्होंने अपशब्दों का प्रयोग किया, जिनमें “नीच” शब्द भी शामिल है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।