राजस्थान में खांसी की दवा का कहर! 2 बच्चों की मौत से मचा बवाल

जयपुर. राजस्थान में खांसी की दवा के कथित कहर का मामला अब और तूल पकड़ता जा रहा है. खांसी की दवा से एक बच्चे की मौत के दावे के बाद अब एक और बच्चे की मौत हो गई है. उसके परिजनों का भी आरोप है कि बच्चे की मौत खांसी की दवा से हुई है. उसके बाद अब चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया है. इस बीच मेडिकल विभाग की जांच में सामने आया है कि इस दवा को सप्लाई करने वाली Kaysons Pharma को दो बाद डिबार किया जा चुका है. अगले साल 13 फरवरी तक इस सिरप कंपनी को डिबार किया हुआ है. फिलहाल पूरे मामले की जांच चल रही है. कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने आरोप लगाया है कि नकली दवा पीने से बच्चों की मौत हुई है। इसके लिए सरकार जिम्मेदार है.

खांसी के दवा से मौत का मामला तूल पकड़ने के बाद मेडिकल विभाग ने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यी कमेटी का गठन कर दिया है. कमेटी में RMSCL के 2 कार्यकारी निदेशक और मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के नोडल अधिकारी को शामिल किया गया है. जांच के लिए राजकीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में दवा के नमूने भेजे गए हैं. सरकार ने डेक्स्ट्रोमेथोर्फेन HBr सिरप IP 13.5mg/5ml [440] के बैच नं. KL-25/147, KL-25/148 की भरतपुर और सीकर से मिली शिकायतों के बाद इसके वितरण और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है. RMSCL का कहना है कि यह दवा जून से बांटी जा रही है. लेकिन इसकी पहले कभी शिकायत नहीं आई.

जांच पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि दवा सप्लायर फर्म Kaysons Pharma दो बार डिबार हो चुकी है. पहली बार डिबार 2023 में टेंडर की शर्तों के उल्लंघन पर किया गया था. वहीं इस साल फरवरी में कफ सिरप के लिए डिबारमेंट किया गया था. इसकी अन्य कफ सिरप में भी गुणवत्ता से जुड़ी कमियां पाई गई थी. उसकी कफ सिरप-692 Assay of Menthol Test में फेल हुई थी. लिहाजा अगले साल 13 फरवरी तक इस सिरप के लिए कंपनी को डिबार कर रखा है.

सीकर श्रीमाधोपुर से हुई थी मामले की शुरुआत
दरअसल इस मामले की शुरुआत सीकर जिले के श्रीमाधोपुर से हुई थी. वहां कथित तौर पर दो बच्चों की खांसी की यह दवा पीने से तबीयत खराब हुई थी. वहीं उसके बाद एक अन्य बच्चे को सीकर एसके अस्पताल दिखाने के लिए लाया गया था. वहां उसे डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया था. लेकिन परिजनों ने बच्चे के शव का पोस्टमार्टम करवाने से मना कर दिया. इस बच्चे को करीब दो महीने पहले झुंझुनूं जिले की चिराना सीएचसी पर भी दिखाया गया था. इस बच्चे के परिजनों का भी आरोप था कि खांसी की दवा पिलाने से बच्चे की तबीयत खराब हुई थी. अब झुंझुनूं मेडिकल विभाग ने भी मामले की जांच शुरू करवाई है.

भरतपुर में दवा से एक बच्चे की मौत का दावा
इस बीच भरतपुर जिले के बयाना में तीन बच्चों की खराब होने के पीछे खांसी की दवा होने का दावा किया गया. इससे सरकार की चिंता बढ़ गई. उसके बाद अब भरतपुर के सेवर थाना इलाके के मलाह गांव में भी ऐसा मामला सामने आया है. वहां भी तीन बच्चों की सीरप पीने से तबीयत खराब होने का दावा किया जा रहा है. इनमे से एक बच्चे की सात-आठ दिन पहले मौत हो गई. भरतपुर सीएमएचओ डॉ. गौरव कपूर का कहना कि बीसीएमओ से इसकी पूरी फेक्चुअल रिपोर्ट मांगी गई है. परिजनों का आरोप है कि सीरप पीने के बाद बच्चों की तबीयत पहले से ज्यादा खराब हो गई थी. उन्हें बेहोश होने के बाद जयपुर रेफर किया गया. अभी चिकित्सा विभाग यहां भी मामले की जांच में जुटा हुआ.

खाचरियावास बोले- मामले को दबाने की बजाय इसकी पूरी जांच करवाई जाए
इस मामले को लेकर पूर्व मंत्री कांग्रेस नेता प्रतापसिंह खाचरियावास भजललाल सरकार पर हमलावर हो गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को दवा के नाम पर जहर बांटने का अधिकार नहीं है. फ्री दवा योजना में ब्लैक लिस्टेड कंपनियों से दवाएं ली जा रही है. उन्होंने पूरे घोटाले में न्यायिक जांच करवाने की मांग की है. सिंह का कहना है कि मामले को दबाने के बजाय इसकी पूरी जांच करवाई जाए.