राजस्थान के जालोर जिले में चार साल पुरानी पारिवारिक रंजिश ने बुधवार को खूनी मोड़ ले लिया। अहोर थाना क्षेत्र के जोगावा गांव में एक युवक ने अपने ही चाचा की कुल्हाड़ी से बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपी ने दिनदहाड़े बस स्टैंड के पास बैठे चाचा पर ताबड़तोड़ हमला कर उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने पिता की मौत का बदला लेना चाहता था और लंबे समय से चाचा को जान से मारने की धमकियां दे रहा था।
बस स्टैंड पर बैठा था चाचा, कुल्हाड़ी लेकर पहुंचा भतीजा
पुलिस के अनुसार, वारदात बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे जोगावा गांव में आहोर-शंखवाली मार्ग स्थित बस स्टैंड के पास हुई। मृतक अखाराम मेघवाल (40) पानी की टंकी के पास बैठे हुए थे। इसी दौरान उनका भतीजा वीजाराम (24) हाथ में कुल्हाड़ी लेकर वहां पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपी ने बिना किसी बहस या कहासुनी के अचानक हमला बोल दिया। अखाराम कुछ समझ पाते उससे पहले ही वीजाराम ने उनके सिर और गर्दन पर लगातार कई वार किए। हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौके पर ही अखाराम की मौत हो गई।
दिनदहाड़े हत्या से गांव में फैली सनसनी
घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। दिनदहाड़े हुई इस हत्या से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। सूचना मिलने पर जालोर डीएसपी छतरसिंह और आहोर थानाधिकारी करणसिंह पुलिस जाब्ते के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू की।
एफएसएल और एमओबी टीम ने जुटाए अहम सबूत
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एफएसएल और एमओबी टीम को भी मौके पर बुलाया। टीमों ने घटनास्थल से खून के नमूने, हथियार से जुड़े साक्ष्य और अन्य तकनीकी सबूत जुटाए। शव को कब्जे में लेकर आहोर अस्पताल की मॉर्च्यूरी में रखवाया गया।
बबूल का पेड़ बना था खूनी विवाद की जड़
पुलिस जांच में हत्या के पीछे चार साल पुरानी रंजिश सामने आई है। जानकारी के अनुसार, करीब चार वर्ष पहले दोनों परिवारों के बीच घर के सामने खड़े एक बबूल के पेड़ को काटने को लेकर विवाद हुआ था। मामूली कहासुनी देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गई थी। उस समय दोनों पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडे चले थे। आरोप है कि इसी झगड़े के दौरान अखाराम ने लोहे के कूट से वार कर अपने भाई मोपाराम और उसके बेटे वीजाराम को घायल कर दिया था।
पिता की मौत ने बदले की आग को दी हवा
घटना में मोपाराम के सिर पर गंभीर चोट लगी थी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद से ही वीजाराम अपने चाचा अखाराम को जिम्मेदार मानता था। ग्रामीणों के अनुसार वह कई बार सार्वजनिक रूप से बदला लेने और चाचा को जान से मारने की धमकी दे चुका था। पुलिस का मानना है कि आरोपी ने लंबे समय से हत्या की योजना बना रखी थी और मौका मिलते ही उसने वारदात को अंजाम दे दिया।
गरीब परिवार से था मृतक, ट्रैक्टर ड्राइवर है आरोपी
ग्रामीणों ने बताया कि मृतक अखाराम बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से थे। वे मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। वहीं आरोपी वीजाराम ट्रैक्टर ड्राइवर का काम करता है। गांव में दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से तनाव का माहौल बना हुआ था।
फरार आरोपी को दबिश देकर पकड़ा, कुल्हाड़ी भी बरामद
वारदात के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी। देर रात पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि हत्या पूरी तरह पूर्व नियोजित थी या फिर किसी तत्कालिक उकसावे के बाद वारदात को अंजाम दिया गया।
पुरानी रंजिश बनी हत्या की सबसे बड़ी वजह
फिलहाल पुलिस हत्या का मामला दर्ज कर जांच में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि पारिवारिक विवाद और पुरानी रंजिश इस हत्याकांड की मुख्य वजह प्रतीत हो रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और आरोपी से पूछताछ के बाद मामले के अन्य पहलुओं का भी खुलासा हो सकेगा। चार साल पहले शुरू हुआ विवाद आखिरकार एक और जान लेने के साथ खूनी अंजाम तक पहुंच गया।