जयपुर। राजस्थान सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पंचायत और नगर निकाय चुनावों में दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों के इलेक्शन लड़ने पर लगी रोक हटा दी है। अब दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार भी पंचायत और नगर निकाय चुनाव लड़ सकेंगे।
राजस्थान सरकार ने पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। अब सूबे में दो से अधिक बच्चे पैदा करने वाले भी पंचायत और नगर निकाय के चुनाव लड़ सकेंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में अब दो से ज्यादा बच्चों वाले उम्मीदवारों के इन चुनावों लड़ने पर लगी रोक हटा दी गई है। सरकार का मानना है कि राज्य में प्रजनन दर अब काफी कम हो चुकी है, इसलिए पुराने नियमों की जरूरत नहीं है। इसके अलावा, कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्तियों को भी चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है।
अब दो से अधिक बच्चों वाले भी लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव कैबिनेट ने बुधवार को उन नियमों को हटाने संबंधी बिल को मंजूरी दे दी जिनके तहत दो से अधिक बच्चे वाले लोगों को इन चुनावों में उतरने से रोक दिया गया था। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए राज्य के पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर जोगाराम पटेल ने कहा कि दो से अधिक बच्चों वाले लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक ऐसे समय में लगाई गई थी जब आबादी बढ़ने पर असरदार कंट्रोल जरूरी समझा गया था।
संशोधन बिल को मंजूरी मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि फर्टिलिटी रेट जो 1991-94 के दौरान 3.6 था अब घटकर 2 हो गया है। ऐसे में इन पाबंदी वाले नियमों की जरूरत नहीं है। कैबिनेट ने राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) बिल, 2026 और राजस्थान म्युनिसिपैलिटीज (संशोधन) बिल 2026 लाने को मंजूरी प्रदान की है। इससे राजस्थान पंचायती राज एक्ट, 1994 के सेक्शन 19 और राजस्थान म्युनिसिपैलिटीज एक्ट 2009 के सेक्शन 24 में बदलाव किए जा सकेंगे।
कुष्ठ रोग से प्रभावित भी लड़ सकेंगे चुनाव पटेल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 24 में बदलाव करने का फैसला लिया है जिसके तहत अब कुष्ठ रोग के आधार पर किसी को चुनाव लड़ने से रोका नहीं जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों को भी आने वाले पंचायत चुनावों में हिस्सा लेने का समान अवसर मिलेगा जिससे कानून में मौजूद भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
आर्थिक अपराधों पर लगेगी लगाम कैबिनेट ने मौजूदा स्टेट रेवेन्यू इंटेलिजेंस डायरेक्टरेट को खत्म करके रेवेन्यू इंटेलिजेंस और इकोनॉमिक ऑफेंस डायरेक्टरेट बनाने को मंजूरी दी है ताकि आर्थिक अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत किया जा सके। यह रियल एस्टेट धोखाधड़ी, बैंक, इंश्योरेंस और शेयर मार्केट से जुड़े वित्तीय अपराधों, मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कैम, नकली इन्सॉल्वेंसी मामलों और फर्जी प्लेसमेंट एजेंसियों से जुड़े अपराधों से निपटेगा।
औद्योगिक विकास, रोजगार और चिकित्सा पर भी फैसला यह नौकरियों और एडमिशन के लिए फेक डॉक्यूमेंट, सरकारी जमीन पर गैर-कानूनी कब्जा और बिक्री, स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन में गड़बड़ियां, शेल कंपनियां और कोऑपरेटिव स्कैम के मामलों को भी देखेगा। कैबिनेट ने औद्योगिक विकास में तेजी लाने और रोजगार पैदा करने के लिए राजस्थान इंडस्ट्रियल पार्क प्रमोशन पॉलिसी 2026 को मंजूरी प्रदान की। इनके तहत, प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे। कैबिनेट ने भारतीय चिकित्सा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान आयुर्वेद, योग और नेचुरोपैथी यूनिवर्सिटी, अजमेर बिल, 2026 के ड्राफ्ट को भी मंजूरी दी है।