टोंक। राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर कोटा नेशनल हाईवे 52 किनारे ढाबे ध्वस्त करने की बिना नोटिस के कार्रवाई करने पर रोक लगाई है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए एक स्थानीय ढाबे के विध्वंस (डिमॉलिश) की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से लगाई रोक लगाई हैं। यह आदेश न्यायालय ने गोपाल गुर्जर द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किए।
याचिकाकर्ता की ओर से वकील अक्षय यादव ने अदालत को अवगत कराया कि संबंधित अधिकारी बिना किसी पूर्व नोटिस के ढाबे को तोड़ने पर आमादा हैं, जबकि वर्ष 2023 में इसी मामले में राजस्थान हाईकोर्ट पहले ही याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्देश जारी कर चुका है।
वकील अक्षय यादव ने दलील दी कि अधिकारियों की इस कार्रवाई में न तो विधिक प्रक्रिया का पालन किया गया है और न ही पूर्व आदेशों का सम्मान। बिना नोटिस ढाबा गिराने की यह कोशिश “मनमानी और अवैध” है। राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद स्पष्ट निर्देश दिया कि अगले आदेश तक ढाबे से संबंधित किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही, अदालत ने अधिकारियों से यह भी पूछा है कि पूर्व आदेशों के बावजूद ऐसी कार्रवाई क्यों शुरू की गई। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर रखी गई है।