624MM बारिश से राजस्थान तरबतर, 125 साल में 7वीं बार इतना पानी बरसा

जयपुर। राजस्थान में मानसून सीजन इस बार रिकॉर्ड तोड़ साबित हो रहा है। तीन महीने का समय बीत चुका है और तीनों ही महीनों में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। इसका असर यह हुआ कि कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, वहीं सूखी पड़ी नदियों में भी पानी बहने लगा। सबसे खास बात यह है कि 125 साल में यह सातवीं बार है जब राजस्थान में इतनी भारी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग की मानें तो सितंबर में भी सामान्य से ज्यादा बारिश का अनुमान है।

मौसम केन्द्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इस बार 1 से 31 अगस्त तक प्रदेश में कुल 184 मिलीमीटर बारिश हुई। यह औसत 155.8 मिलीमीटर से 18 फीसदी ज्यादा है। अगस्त में ज्यादातर बारिश पश्चिमी राजस्थान और दक्षिण-पूर्वी जिलों में हुई। हनुमानगढ़, चूरू, नागौर, श्रीगंगानगर, जालोर, बीकानेर, टोंक, बूंदी, सवाई माधोपुर, बारां, कोटा, सीकर, जयपुर और दौसा में औसत से अधिक बरसात दर्ज की गई।

उन्होंने बताया कि अगस्त के शुरुआती तीन सप्ताह में मानसून कमजोर रहा। पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में लगातार 10 से 15 दिन तक बारिश नहीं हुई थी। लेकिन 20 अगस्त के बाद मानसून एक्टिव हुआ और तेज बारिश का दौर शुरू हुआ, जो अब तक जारी है।

अगस्त महीने के दौरान बूंदी, कोटा, सवाई माधोपुर, टोंक और पाली जिलों में भारी बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। 20 से 30 अगस्त के बीच कई जगहों पर तेज बारिश दर्ज हुई। बूंदी के नैनवां में एक ही दिन में 503 मिलीमीटर बरसात दर्ज हुई। भारी बरसात से कई इलाकों में पानी भर गया और कई लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे।

अगस्त में कुछ जिले ऐसे भी रहे जहां औसत से कम बारिश हुई। इनमें राजसमंद, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, झुंझुनूं, प्रतापगढ़, सिरोही, बाड़मेर और पाली शामिल हैं।

1 जून से 1 सितंबर तक प्रदेश में कुल 624.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह पूरे सीजन की सामान्य बारिश 435.6 मिलीमीटर से 43 फीसदी ज्यादा है। पिछले 125 साल की रिपोर्ट देखें तो साल 1917 में सबसे ज्यादा 844.2 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इसके बाद 1908 में 682.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। मौजूदा सीजन फिलहाल टॉप-10 में सातवें नंबर पर है और बारिश का दौर जारी रहा तो यह तीसरे नंबर पर भी पहुंच सकता है।

तेज बारिश का असर यह हुआ कि रेगिस्तान की सूखी पड़ी लूणी नदी में भी पानी आ गया। इस साल यह सातवीं बार है जब लूणी नदी में पानी आया है। यह नजारा राजस्थान के लोगों के लिए असाधारण माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से यह नदी सूखी पड़ी रहती थी।

बारिश से प्रदेश के बांध और तालाब भी लबालब हो चुके हैं। अब तक 51 फीसदी बांध ओवरफ्लो हो चुके हैं। राजस्थान में कुल 693 छोटे-बड़े बांध हैं, जिनमें से 358 बांध पूरी तरह भर गए हैं। वहीं 216 बांध ऐसे हैं जिनमें 25 से 90 फीसदी तक पानी आ चुका है। इसका फायदा किसानों और आम लोगों को लंबे समय तक मिलेगा।

मौसम केन्द्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि सितंबर के पहले दो सप्ताह में मानसून एक्टिव रहने की संभावना है। इस दौरान पूर्वी राजस्थान में ज्यादा असर दिखाई देगा। इससे सितंबर में भी सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना है।

राजस्थान में इस बार मानसून ने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया है। आधे से ज्यादा बांध भर चुके हैं, रेगिस्तान की नदियों में पानी बह रहा है और कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति भी बनी है। पिछले 125 साल में सिर्फ 7 बार ऐसी बारिश दर्ज हुई है। अगर सितंबर में भी बारिश का दौर जारी रहा तो यह सीजन राजस्थान के बारिश के इतिहास में तीसरे स्थान पर दर्ज हो सकता है।