राजस्थान: फर्जी इंटरव्यू के बहाने आंखें स्कैन कर रहे ठग

नई दिल्ली। साइबर ठगों ने लोगों की मेहनत की कमाई उड़ाने और पहचान चोरी करने का बेहद खतरनाक और नया तरीका निकाला है। ऑनलाइन नौकरी के इंटरव्यू या ई-केवाईसी के बहाने अपराधियों द्वारा लोगों की आंखों की आइरिस और चेहरे का लाइव डेटा रिकॉर्ड किया जा रहा है। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से ऐसा डीपफेक वीडियो तैयार किया जाता है जो बिल्कुल असली दिखता है।

इस फर्जी वीडियो और डेटा के जरिए जालसाज पीड़ित के आधार कार्ड में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदलवाने की कोशिश करते हैं। जैसे ही आधार में नंबर बदलता है, उससे जुड़े सभी जरूरी ओटीपी अपराधियों के पास पहुंचने लगते हैं। इसके बाद बैंकिंग धोखाधड़ी से लेकर डिजिलॉकर में सेंधमारी तक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। देश भर से आ रही ऐसी कई शिकायतों के बाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक कड़ा एडवाइजरी जारी किया है।

ऑनलाइन इंटरव्यू के बहाने ऐसे फंसी जयपुर की युवती
इस नए साइबर फ्रॉड का शिकार जयपुर की एक 28 वर्षीय युवती हुई। उसे एक जानी-मानी निजी कंपनी के नाम पर फर्जी ऑनलाइन इंटरव्यू का लिंक भेजा गया था। वीडियो कॉल के दौरान फेस वेरिफिकेशन और स्कैनिंग के नाम पर ठगों ने युवती से उसका चेहरा अलग-अलग एंगल में घुमाने और आंखें झपकने को कहा।

इंटरव्यू खत्म होने के बाद कंपनी की तरफ से कोई जवाब तो नहीं आया, लेकिन कुछ दिनों बाद युवती के वास्तविक मोबाइल पर ई-केवाईसी और डिजिटल वॉलेट एक्टिवेशन के मैसेज आने शुरू हो गए। जब मामले की जांच की गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

ठगों ने इंटरव्यू के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो डेटा से एआई-बेस्ड फेस डीपफेक तैयार किया था, ताकि उसकी पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी डिजिटल अकाउंट खोले जा सकें।

कॉमन सर्विस सेंटर्स के जरिए सिस्टम में सेंधमारी
क्राइम ब्रांच की शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि ठग आधार अपडेट करने वाले कॉमन सर्विस सेंटर्स के सुरक्षा तंत्र में सेंध लगा रहे हैं। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, अपराधी चोरी की लॉगिन आईडी, फर्जी एजेंट नेटवर्क या फिर सिस्टम के भीतर मौजूद कुछ लोगों की मिलीभगत से मुख्य डेटाबेस तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

इस बढ़ते डिजिटल फर्जीवाड़े और एआई के दुरुपयोग को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने अब देश भर के सीएससी और आधार अपडेट सिस्टम की चौबीसों घंटे लगातार मॉनिटरिंग शुरू कर दी है।

राजस्थान में फर्जी आधार रैकेट का भंडाफोड़
इसी कड़ी में सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। 17 अप्रैल 2026 को राजस्थान एटीएस और हनुमानगढ़ पुलिस ने एक संयुक्त कार्रवाई करते हुए भादरा कस्बे में चल रहे एक अवैध आधार एनरोलमेंट सेंटर पर छापा मारा। इस छापेमारी में एक बड़े फर्जी आधार रैकेट का पर्दाफाश हुआ और मुख्य आरोपी कुलदीप शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी कुलदीप दूसरे अधिकृत ऑपरेटरों की आईडी का अवैध रूप से इस्तेमाल कर फर्जी आधार कार्ड बना रहा था।

सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि यह गिरोह बायोमीट्रिक सुरक्षा को बायपास करने के लिए कंप्यूटर से एडिट की गई तस्वीरों, फर्जी बायोमीट्रिक क्लोन और एआई आधारित डिजिटल छेड़छाड़ जैसी अत्यधिक उन्नत तकनीकों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहा था।