सोना उगल रही राजस्थान की धरती! बांसवाड़ा में फिर मिला करोड़ों का खजाना

बांसवाड़ा: राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक बार फिर सोने की चमक दिखाई दी है। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की रिपोर्ट में घाटोल तहसील के कांकरियागढ़ा ब्लॉक में करीब 1.20 टन सोना मिलने का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सोने की मौजूदा बाजार दर के अनुसार कीमत लगभग ₹1449.72 करोड़ बैठती है। यह लगातार तीसरी बार है जब बांसवाड़ा में सोने का भंडार मिला है। इसके साथ ही यहां तांबा, निकल और कोबाल्ट जैसे बहुमूल्य खनिजों के प्रमाण भी मिले हैं।

जी-2 लेवल जांच के आदेश, 3 नवंबर को खुलेंगे आवेदन

सोने के संभावित भंडार की पुष्टि के बाद केंद्र सरकार ने यहां जी-2 स्तर का डीप सर्वे करवाने का निर्णय लिया है। इसके लिए आवेदन 29 सितंबर को आमंत्रित किए गए थे, जिनकी अंतिम तिथि 14 अक्टूबर रखी गई थी। अब 3 नवंबर को आवेदन खोले जाएंगे और सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी को सर्वेक्षण का लाइसेंस दिया जाएगा। यह ब्लॉक करीब 2.59 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, जिसमें कांकरियागढ़ा, डूंगरियापाड़ा, देलवाड़ा रावना और देलवाड़ा लोकिया गांव शामिल हैं।

1.20 टन सोने के साथ मिलेगा कॉपर, निकल और कोबाल्ट

प्रारंभिक सर्वेक्षण के अनुसार, यहां 1.20 टन सोना और करीब 1,000 टन कॉपर होने का अनुमान है। साथ ही निकल और कोबाल्ट की भी पर्याप्त मात्रा मौजूद है।
GSI के वरिष्ठ भूवैज्ञानिकों का कहना है कि यहां 150–200 मीटर की दूरी पर 600–700 फीट गहराई तक ड्रिलिंग की गई थी। अब डीप सर्वे से खनिज भंडार की वास्तविक मात्रा का निर्धारण किया जाएगा। यह प्रक्रिया करीब 3 साल तक चलेगी।

बांसवाड़ा बन रहा ‘राजस्थान का गोल्ड हब’

बांसवाड़ा जिले में इससे पहले भी घाटोल के भुकिया और जगपुरा क्षेत्र में GSI ने 11.48 करोड़ टन सोने के भंडार की खोज की थी। इनमें 13,739 टन कोबाल्ट और 11,146 टन निकल भी पाया गया था। खनन का लाइसेंस रतलाम की एक कंपनी को मिला था, हालांकि अभी खनन कार्य शुरू नहीं हुआ है।

देश में राजस्थान की हिस्सेदारी बढ़ेगी

अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहा, तो राजस्थान देश में सोना निकालने वाला दूसरा सबसे बड़ा राज्य बन जाएगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे देश की सोने की कुल हिस्सेदारी में राजस्थान की भागीदारी 25% से अधिक हो जाएगी।
वर्तमान में कर्नाटक के हुट्टी और कोलार गोल्ड फील्ड में सोने का उत्पादन होता है, जबकि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में निजी क्षेत्र में शुरुआती सर्वे चल रहे हैं।

स्थानीय लोगों के लिए खुलेगा रोजगार का नया रास्ता

बांसवाड़ा की भूगर्भीय संरचना लगभग 5,000 साल पुरानी बताई जाती है। यहां मिलने वाले खनिजों और सोने की खोज से रोजगार के नए अवसर बनेंगे। खनन शुरू होने के बाद क्षेत्र में टेक्नीशियन, मजदूर और आवासीय सुविधाओं की मांग बढ़ेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।