जयपुर. राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग के बाद उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें मंत्री जोगाराम पटेल और सुमित गोदारा भी मौजूद रहे. प्रेस कॉन्फ्रेंस में डिप्टी सीएम बैरवा ने बताया, राजस्थान सरकार धर्मांतरण को रोकने के लिए राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025 में बड़े और सख्त बदलाव करने की तैयारी में है. इस बिल में ऐसे प्रावधान जोड़े जा रहे हैं, जिनसे बल, दबाव या प्रलोभन देकर धर्मांतरण करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके.
7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा
नए प्रावधानों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति बल या प्रलोभन से किसी का धर्म बदलवाता है, तो उसे कम से कम 7 साल की कैद और 5 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा. गंभीर मामलों में यह सजा और भी कड़ी हो सकती है. ऐसे मामलों में आजीवन कारावास और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. सरकार का कहना है कि इस कदम से धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा होगी और इस तरह की अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी.
संस्थाओं पर भी कार्रवाई
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई संस्था धर्मांतरण जैसी गतिविधियों में शामिल पाई जाती है, तो उसकी सरकारी ग्रांट रोक दी जाएगी और उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा.
‘लव जिहाद’ जैसे विवाह होंगे अवैध
संशोधित बिल में ‘लव जिहाद’ जैसे विवाहों पर भी प्रावधान जोड़े गए हैं। इस कानून के तहत ऐसे विवाह “ab initio void” (यानी शुरुआत से ही अवैध) माने जाएंगे. अगर कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन के बाद विवाह करना चाहता है, तो उसे मजिस्ट्रेट को पहले से सूचना देना अनिवार्य होगा. साथ ही, धर्म परिवर्तन होने के तुरंत बाद भी इसकी जानकारी मजिस्ट्रेट को देना जरूरी होगा।
सरकार की राय
राज्य सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और बल या प्रलोभन से हो रहे अवैध धर्मांतरण पर सख्ती से रोक लगाना है. इन नए प्रावधानों के लागू होने के बाद ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई तेज और प्रभावी हो सकेगी.