राजस्थान के इस छोटे जिले की बड़ी छलांग: जोधपुर सहित कई बड़े जिलों को पछाड़ा

सवाई माधोपुर। बाघों की धरती अब विज्ञान नवाचार की पहचान भी बन गई है। इंस्पायर अवार्ड मानक योजना में इस बार सवाई माधोपुर ने ऐसा प्रदर्शन किया है कि बड़े जिलों को पीछे छोड़ते हुए राजस्थान में दूसरा स्थान हासिल कर लिया।

सवाई माधोपुर जिले के 367 विद्यार्थियों का चयन हुआ है, जिन्हें अपने वैज्ञानिक विचारों को मॉडल में बदलने के लिए 10-10 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस तरह जिले को कुल 36 लाख 70 हजार रुपए की स्वीकृति मिली है।

51 प्रतिशत तक हुई वृद्धि
पिछले वर्ष जहां 244 विद्यार्थियों का चयन हुआ था, वहीं इस बार संख्या बढ़कर 367 तक पहुंच गई है। यानी 51 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि। इतना ही नहीं, इस बार जिले से 5236 विद्यार्थियों का ऑनलाइन पंजीयन हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। आँकड़े बताते हैं कि बच्चों में विज्ञान और नवाचार के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है।

जयपुर रहा पहले स्थान पर
राजस्थान के विभिन्न जिलों में चयनित विद्यार्थियों की संख्या पर नजर डालें तो जयपुर 604 विद्यार्थियों के साथ पहले स्थान पर है, जबकि सवाई माधोपुर 367 विद्यार्थियों के साथ दूसरे स्थान पर। इसके बाद झुंझुनूं (282), अलवर (254), जोधपुर (248) और चित्तौड़गढ़ (226) आते हैं। अपेक्षाकृत छोटे जिले होने के बावजूद सवाई माधोपुर ने कई बड़े जिलों को पीछे छोड़ दिया है।

सामान्य वर्ग के सवार्धिक विद्यार्थी
चयनित विद्यार्थियों में 221 सामान्य एवं ओबीसी वर्ग, 89 अनुसूचित जाति वर्ग और 57 अनुसूचित जनजाति वर्ग के हैं। यह आंकड़ा बताता है कि ग्रामीण और वंचित वर्गों की प्रतिभा को भी बराबरी का मंच मिला है। इस सफलता के पीछे प्रशासन और शिक्षा विभाग की समन्वित कार्यशैली को “सवाई माधोपुर मॉडल” कहा जा रहा है।

जिला कलक्टर काना राम के नेतृत्व में नियमित मॉनिटरिंग और समीक्षा बैठकें हुईं। विद्यालयों में विज्ञान प्रदर्शनियां, नवाचार कार्यशालाएं और मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए। शिक्षकों ने बच्चों को स्थानीय समस्याओं के समाधान पर सोचने के लिए प्रेरित किया। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी समान अवसर देकर उनकी प्रतिभा को सामने लाया गया।

यह है योजना का उद्देश्य
इंस्पायर अवार्ड–मानक योजना का उद्देश्य विद्यालय स्तर पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता और समस्या समाधान क्षमता का विकास करना है। चयनित विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि देकर उनके विचारों को वैज्ञानिक मॉडल में बदलने का अवसर दिया जाता है।

आगे चलकर ये मॉडल राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में भी प्रस्तुत किए जाते हैं। सवाई माधोपुर की यह उपलब्धि न केवल जिले की शैक्षिक पहचान को मजबूत करती है, बल्कि आने वाले वर्षों में प्रेरणा का स्रोत भी बनेगी। छोटे जिले की यह बड़ी छलांग साबित करती है कि विज्ञान और नवाचार की असली ताकत गाँवों और कस्बों के बच्चों में छिपी है।