महापाप से कम नहीं हैं ये गलतियां जो बनती हैं पितृ दोष का कारण, पूरा परिवार झेलता है पितरों का कहर

Pitra Dosh kya hota hai: पितर नाराज हों तो पितृ दोष लगता है. इसके अलावा कुंडली में ग्रहों की खास स्थिति भी पितृ दोष पैदा करती है. पितृ दोष से बचने के लिए और पितरों की कृपा पाने के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है. ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है. गरीबों को दान दिया जाता है. साथ ही पितृ पक्ष के दौरान ऐसा कोई काम ना करें, जो पितरों को नाराज करता हो और पितृ दोष का कारण बनता हो. इस साल 7 सितंबर से 21 सितंबर तक पितृ पक्ष या श्राद्ध हैं. जानिए वो कौनसी गलतियां हैं, जिनके कारण पितृ दोष लगता है और पूरे परिवार को इसके कारण ढेर सारे कष्‍ट उठाने पड़ते हैं. घर में अशांति, कलह, गरीबी डेरा जमा लेती है. विवाह योग्‍य युवक-युवतियों की शादी नहीं होती, संतान नहीं होती है.

पितृ दोष के पीछे कारण

– पितृ पक्ष के दौरान पितरों के लिए पिंडदान या श्राद्ध न करना पितृ दोष की वजह बनता है. पिंडदान-श्राद्ध ना करने से पितरों की आत्‍मा को शांति नहीं मिलती है, जिससे वह नाराज हो जाते हैं और पूरे परिवार को कष्‍ट उठाने पड़ते हैं.

– पूर्वजों की कोई इच्‍छा अधूरी रह जाए तो वह पितृ दोष का कारण बनता है. इसका खामियाजा पूरा वंश भुगतता है. यदि आपकी जानकारी में है तो पूर्वजों की इच्‍छाएं पूरी करने की कोशिश जरूर करें.

– शास्त्रों के अनुसार, यदि किसी परिजन का अंतिम संस्‍कार विधि-विधान से ना किया जाए तो उसकी आत्‍मा भटकती रहती है. इससे परिवार पर पितृ दोष लगता है. साथ ही जो व्‍यक्ति अपने माता-पिता का अपमान करता है, वह भी पितृ दोष का कहर झेलता है. लिहाजा कभी भी माता-पिता या उनके समकक्ष लोगों का अपमान ना करें.

– शास्त्रों के अनुसार पीपल, बरगद, बेलपत्र और नीम के पेड़ को हिंदू धर्म में पवित्र और पूजनीय माना गया है. इन पेड़ों का काटना भी पितृ दोष का कारण बनता है.

– जो लोग बेजुबान जानवरों की हत्‍या करते हैं या उन्‍हें सताते हैं. उन्‍हें भी कई तरह के ग्रह दोषों का सामना करना पड़ता है, जिसमें पितृ दोष भी शामिल है.

– पितृ पक्ष के दौरान बाल-नाखून काटना, मांस-मदिरा का सेवन करना, सादगी छोड़कर जश्‍न मनाना या ऐश की जिंदगी जीना भी पितरों को नाराज कर देता है. जिससे पितृ दोष लगता है. कभी भी पितृ पक्ष में ऐसे काम ना करें, जो इन 15 दिनों में निषिद्ध होते हैं. नियमानुसार श्राद्ध के 15 दिनों में बेहद सादगी पूर्ण जीवन जीते हुए पितरों के प्रति सम्‍मान करना चाहिए.