दिवाली से पहले क्यों आती है उल्लुओं पर आफत, जानें इस त्योहार से क्या है उल्लू का कनेक्शन

Diwali 2025: दिवाली नजदीक आते ही उल्लुओं पर संकट आ जाता है. चलिए जानते हैं कैसे. दिवाली पर कुछ लोग अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और धन के लालच में उल्लुओं को पकड़ने लगते हैं. भारत के कुछ राज्यों में उल्लुओं की तस्करी तेज हो जाती है. वन विभाग की सख्ती के बावजूद उल्लुओं को जंगल से पकड़कर काले बाजारों में बेच दिया जाता है. चलिए जानते हैं दिवाली से उल्लू का क्या संबंध है.

क्यों पकड़ते हैं उल्लू?
दरअसल, दिवाली पर मां लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और मां लक्ष्मी जी को धन की देवी माना जाता है. इसके अलावा उल्लू मां लक्ष्मी जी की सवारी होता है. ऐसे में दिवाली के दौरान कुछ लोग जो तांत्रिक क्रियाओं में भरोसा रखते हैं उनको ऐसा लगता है कि दिवाली की रात उल्लू की बलि देने से लक्ष्मी हमेशा के लिए घर में वास कर लेती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है. यही कारण है कि दिवाली नजदीक आते ही तस्कर जंगलों में उल्लू की तलाश में एक्टिव हो जाते हैं और पकड़कर काले बाजार में बेचते हैं. कुछ लोग अपने तांत्रिक क्रियाओं को सफल बनाने के लिए इसे खरीदते हैं. ऐसे में उल्लू की कीमत हजारों से लेकर लाखों में चली जाती है. इसके अलावा कई इलाकों में ये मान्यता है कि उल्लू तांत्रिक शक्तियों का प्रतीक होता है. कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि उल्लू की चोंच से दुश्मन को हराया जा सकता है और उल्लू के पैर तिजोरी में रखने से धन आता है.

क्या-क्या होता है उल्लुओं के साथ?
जानकारी के अनुसार दिवाली से लगभग महीने भर पहले ही उल्लुओं को पकड़ने का काम शुरू हो जाता है. इसके बाद उल्लुओं को अंधेरे में रखा जाता है. उन पर खास तंत्र विधियों को किया जाता है. कहा जाता है कि इस दौरान उन्हें शराब और मांस भी दिया जाता है और फिर दिवाली की रात को बलि दी जाती है. कुछ लोगों की मान्यता है कि घर में लक्ष्मी और अलक्ष्मी दोनों का संतुलन बनाए रखने के लिए ये जरूरी है. वन विभाग के अनुसार, तस्करी की कई कोशिशों को रोका गया है, लेकिन दिवाली के मौके पर डिमांड ज्यादा होने के कारण तस्कर नए नए रास्ते निकालते रहते हैं.

क्या कहता है कानून?
आपको बता दें कि इंडिया में उल्लू संरक्षित पक्षी है. भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत उल्लू को पकड़ना, बेचना या मारना पूरी तरह गैरकानूनी है. इसमें दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा हो सकती है.