भारतीय टीम के हेड कोच बनना चाहते है चेतेश्वर पुजारा, गौतम गंभीर को खुला चैलेंज

नई दिल्ली. कभी-कभी शोर करने वालों से ज़्यादा, खामोश लड़ने वाले इतिहास लिख जाते हैं. ऐसा ही एक चेहरा, एक नाम, और एक ठहरी हुई आंखें सामने आएंगी जिसका नाम होगा चेतेश्वर पुजारा. जिसने न तो स्लेजिंग की, न ही स्टाइल के लिए हेडलाइंस मांगी बस हर बार जब टीम को उसकी ज़रूरत थी, वो चुपचाप बल्ला लेकर खड़ा हो गया. राजकोट की गलियों से लेकर मेलबर्न और जोहान्सबर्ग तक,हर मैदान पर उसने एक ही काम किया बॉल को झेला, वक़्त को थामा, और भारत को संभाला. अब वो एक नई जिम्मेदारी को संभालने की फिर तैयारी कर रहे है.

हाल में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट को अलविदा कहने वाले चेतेश्वर पुजारा दोबारा टीम के साथ जुड़ना चाहते है पर वो इस बार वो अपनी भूमिका अलग तरीके की देख रहे है. न्यूज 18 हिंदी से एक्सक्लूसिव बातचीत में पुजारा ने कहा कि वो भविष्य में टीम इंडिया के कोचिंग की जिम्मेदारी उठाने को तैयार है और अपने अनुभव को युवा खिलाड़ियों के सात साझा करने में खुशी होगी.

103 टेस्ट खेलने के अनुभव के साथ कोई कोच बनने के अपने इरादे जताएगा तो आप उससे शायद ये जिम्मेदारी देनें में देर नहीं लगाएंगे खासतौर पर तब जब टेस्ट में भारतीय टीम का प्रदर्शन का ग्राफ नीचे की तरफ हो. चेतेश्वर पुजारा ने न्यूज 18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि वो क्रिकेट से जुड़े रहना चाहते है और जो कुछ उन्होंने क्रिकेट से हासिल अगर कोच के पद के लिए आफर आता है तो वो इसके लिए तैयार है. पुजारा ने आगे कहा कि उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट सालों खेलकर जो कुछ अनुभव इकठ्ठा किया है उसको युवा खिलाड़ियों में बांटने को तैयार है. यानि चेतेश्वर ने बीसीसीआई को संकेत दे दिया है कि वो जिम्मेदारी उठाने को तैयार है बस अब ये देखना दिलचस्प होगा बोर्ड पुजारा के क्रिकेटिंग ब्रेन का इस्तेमाल कैसे करता है.

कोच बनने की क्वालिटी हैं मेरे पास
103 टेस्ट मैच, 7000 से ज़्यादा रन, और न जाने कितनी बार, एक पूरा दिन बिना आउट हुए क्रीज पर पूरा दिन बिताना, ना जाने कितनी चोट खाकर देश के लिए खड़े रहने वाले चेतेश्वर पुजारा ने बताया कि कोच बनने के लिए सबसे बड़ी खासियत ये होनी चाहिए कि वो विपरीत परिस्थिति में भी शांत रहे. चेतेश्वर पुजारा ने न्यूज 18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा 17 साल की उम्र से उन्होंने यहीं सीखा जो उनके क्रिकेटिंग करियर में काम आया और जब आगे उनको अगर कोच पद की जिम्मेदारी दी जाती है तब भी उनके बहुत काम आएगा. इसमें कोई शक नहीं कि चेतेश्वर के पास शानदार दिमाग के साथ साथ खेल की समझ भी है और अनुभव उनको एक शानदार कोच बना सकता है.