103 गुना ताकतवर…वैज्ञानिक कर रहे चींटियों पर रिसर्च, इनकी टीमवर्क से बनेगा रोबोट्स का भविष्य

Ants vs Robots: अफ्रीका और दक्षिण प्रशांत के द्वीपों में रहने वाली बुनकर चींटियां पत्तों को जोड़कर अद्भुत घोंसले बनाती हैं. वैज्ञानिक हमेशा से ये जानना चाहते थे कि ये छोटी-छोटी चींटियां इतने बड़े पत्तों को कैसे मोड़ देती हैं. अब, मैक्वेरी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली बात खोजी है. उन्होंने पाया कि अकेली चींटी से ज्यादा समूह या ग्रुप में काम करने वाली चींटियां ज्यादा ताकतवर होती हैं. करेंट बायोलॉजी पत्रिका में छपे शोध के मुताबिक, बुनकर चींटियां टीम में काम करने बहुत ज्यादा असरदार हो जाती हैं.

कैसे इतनी ताकतवर हो जाती हैं चींटियां?
अकेली चींटी अपने वजन से 60 गुना तक भार खींच सकती है. लेकिन जब ये समूह में काम करती हैं तो हर एक चींटी अपने वजन से 103 गुना तक भार खींच पाती है. ये कमाल उनके चिपटिपे पैरों की वजह से होता है. इन पैरों की मदद से वे पत्तियों की सतह पर जंजीर जैसी पकड़ बना लेती हैं जिससे खींचने में आसानी होती है.

कैसे की गई ये रिसर्च?
इसका अध्ययन करने के लिए जीवविज्ञानी क्रिस रीड और उनकी टीम ने उत्तर-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया से चींटियों की 6 कॉलोनियों को इकट्टा किया. लैब में उन्होंने बल संवेदकों से जुड़े हुए कागज के टुकड़े इस्तेमाल किए. जब भी चींटियां इन कागजों को मोड़ती तो उनके खींचने की ताकत को मापा जाता.

रिसर्च में क्या सामने आया?
यह खोज इंसानों से बिल्कुल ही अलग है. इंसान जब भी बड़े समूह में काम करते हैं तो कम ताकत लगाते हैं जिसे रिंगेलमैन प्रभाव कहते हैं. लेकिन बुनकर चींटियां इससे उलट काम करती है और ये ग्रुप में काम करके अपनी व्यक्तिगत ताकत को बढ़ाती हैं. अब, वैज्ञानिक ये पता लगाने में जुटे हैं कि आखिरकार चींटियां बिना फिसले अपनी ताकत को कैसे बनाए रखती हैं.

इस खोज से क्या फायदा मिलेगा?
ये जानकारी रोबोटों की भी मदद कर सकती है. वैज्ञानिक चींटियों से सीखकर ऐसे रोबोट बना सकते हैं जो एक साथ मिलकर भारी सामान उठा सकें या खींच सकें. रीड कहते हैं, बुनकर चींटियां हमें सिखा सकती हैं कि बहुत काम करने वाली रोबोट टीमें कैसे बनाई जाती हैं. इस तरह, पेड़ पर रहने वाली ये छोटी चींटियां भविष्य में रोबोटिक्स के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

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