अगर मंगल गायब हो गया तो पृथ्वी का क्या होगा? खौफनाक सच आया सामने, फिर से लिखनी पड़ेंगी साइंस की किताबें

नई दिल्ली: पृथ्वी के मौसम में बदलाव सिर्फ सूरज या प्रदूषण की वजह से नहीं हो रहा है. वैज्ञानिकों ने एक ऐसा खुलासा किया है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा. हमारे पड़ोसी ग्रह मंगल का पृथ्वी के क्लाइमेट पर गहरा असर पड़ता है. यह लाल ग्रह अपनी ग्रेविटी से पृथ्वी को खींचता है और मौसम का मिजाज बदल देता है. नई रिसर्च बताती है कि मंगल ग्रह पृथ्वी के ऑर्बिट और झुकाव को कंट्रोल करता है. इसे मिलानकोविच साइकिल कहते हैं. अगर मंगल न होता तो शायद पृथ्वी का मौसम ऐसा न होता जैसा आज है. स्टीफन केन की अगुवाई में हुई इस स्टडी ने खगोल विज्ञान में हलचल मचा दी है. यह रिसर्च बताती है कि कैसे दूसरे ग्रह हमारी दुनिया को चला रहे हैं. यह समझना जरूरी है कि हमारा क्लाइमेट एक अकेले ग्रह की कहानी नहीं है.

आखिर वैज्ञानिकों ने कैसे पकड़ा मंगल का यह सीक्रेट खेल?
पृथ्वी लाखों सालों से कभी बर्फ में जम जाती है तो कभी गर्म हो जाती है. वैज्ञानिक इसे मिलानकोविच साइकिल कहते हैं. यह सब पृथ्वी के ऑर्बिट और उसके झुकने के तरीके पर निर्भर करता है. अब तक माना जाता था कि जुपिटर और वीनस जैसे बड़े ग्रह इसमें अहम रोल निभाते हैं. लेकिन नई रिसर्च ने इस सोच को बदल दिया है.

स्टीफन केन और उनकी टीम ने एक अनोखा एक्सपेरिमेंट किया. उन्होंने कंप्यूटर सिमुलेशन का इस्तेमाल किया. इसमें उन्होंने मंगल ग्रह के वजन को जीरो से लेकर दस गुना तक बढ़ाया. उन्होंने यह देखा कि मंगल के वजन में बदलाव से पृथ्वी के ऑर्बिट पर क्या असर पड़ता है. नतीजे हैरान करने वाले थे. छोटा होने के बावजूद मंगल का असर बहुत गहरा है.

क्या हिमयुग लाने के पीछे भी मंगल का ही हाथ है?
वैज्ञानिकों ने पाया कि सौरमंडल में एक रिदम काम करती है. वीनस और जुपिटर मिलकर 4 लाख 5 हजार साल का एक साइकिल चलाते हैं. यह एक मेट्रोनोम की तरह है जो टिक-टिक करता रहता है. मंगल का वजन कुछ भी हो यह साइकिल नहीं बदलता है. यह पृथ्वी के क्लाइमेट का बेस है.

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है. एक छोटा साइकिल भी है जो 1 लाख साल का होता है. यही साइकिल तय करता है कि पृथ्वी पर आइस एज कब आएगा.

रिसर्च में पता चला कि यह साइकिल मंगल पर निर्भर है. अगर मंगल का वजन बढ़ता है तो यह साइकिल लंबा हो जाता है. मतलब मंगल ही वह फैक्टर है जो हमारे हिमयुग की टाइमिंग सेट कर रहा है.

अगर मंगल न होता तो क्या पृथ्वी का क्लाइमेट सिस्टम फेल हो जाता?
इस रिसर्च का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा ग्रैंड साइकिल है. यह 24 लाख साल का एक लंबा क्लाइमेट साइकिल है. सिमुलेशन में देखा गया कि जब मंगल का वजन जीरो किया गया तो यह साइकिल गायब हो गया. इसका मतलब है कि मंगल के बिना यह पैटर्न अस्तित्व में ही नहीं होता. यह ग्रैंड साइकिल पृथ्वी और मंगल के ऑर्बिट के घूमने से जुड़ा है. यह तय करता है कि लाखों सालों में पृथ्वी को कितनी सूरज की रोशनी मिलेगी. मंगल का गुरुत्वाकर्षण एक रेसोनेंस पैदा करता है. यही रेसोनेंस पृथ्वी के लॉन्ग टर्म क्लाइमेट को स्थिर रखता है. मंगल के बिना पृथ्वी का मौसम बहुत अलग और शायद खतरनाक हो सकता था.

पृथ्वी के झुकने और घूमने में मंगल की क्या भूमिका है?

पृथ्वी अपनी धुरी पर एक खास डिग्री पर झुकी हुई है. इसे ऑब्लिक्विटी कहते हैं. इसी झुकाव की वजह से हमारे यहां सर्दी और गर्मी के मौसम आते हैं. इस झुकाव में हर 41 हजार साल में बदलाव आता है. रिसर्च बताती है कि मंगल इस झुकाव को भी कंट्रोल करता है. सिमुलेशन में जब मंगल का वजन बढ़ाया गया तो यह साइकिल बदल गया. अगर मंगल असली वजन से दस गुना भारी होता तो यह साइकिल 55 हजार साल का हो जाता. इसका सीधा असर पृथ्वी की बर्फ की चादरों पर पड़ता. ग्लेशियर कब पिघलेंगे और कब बनेंगे यह सब बदल जाता. मंगल की ग्रेविटी पृथ्वी को लगातार खींच रही है.

क्या दूसरे ग्रहों पर जीवन खोजने में यह रिसर्च मदद करेगी?
यह रिसर्च सिर्फ पृथ्वी तक सीमित नहीं है. इसका असर खगोल विज्ञान के भविष्य पर भी पड़ेगा. वैज्ञानिक अब दूसरे सौरमंडलों में जीवन की तलाश कर रहे हैं. हमें लगता था कि किसी ग्रह पर जीवन के लिए सिर्फ उसका सूरज से दूर होना काफी है. लेकिन अब नजरिया बदलना होगा. हमें देखना होगा कि उस ग्रह के पड़ोसी ग्रह कैसे हैं. अगर पास में कोई भारी ग्रह है तो वह