आजम को राहत, अखिलेश की बेरुखी, क्या पूर्व मंत्री बिगाड़ेंगे सपा का खेल? मची हलचल

Azam Khan: 23 महीने से सीतापुर जेल में बंद आज़म खान को लगभग सभी मामलों में जमानत मिल गई है और अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता लगभग साफ है. लेकिन खबर ये नहीं है, खबर तो ये है कि अपने कद्दावर नेता की इतनी बड़ी खबर पर ना तो अब तक अखिलेश यादव ने कोई ट्वीट किया ना उनकी पार्टी ने एक लाइन का स्टेटमेंट देना जरूरी समझा. अंदाजा इसी से लगा लीजिए कि मौजूदा वक्त में रामपुर से मोहिबुल्ला नदवी समाजवादी पार्टी के सांसद हैं, लेकिन उनका भी कोई बयान नहीं है. मोहिबुल्ला नदवी और आजम खान के बीच तो कोई बातचीत भी नहीं है. ना कभी मोहिबुल्ला नदवी उनसे मिलने जेल गए, ना कभी उनके परिवार से मुलाकात की.

2017 से 2019 के बीच आज़म खान पर ताबड़तोड़ केस दर्ज कर दिए गए, 89 केस के साथ उन्हें लगभग लगभग माफिया ही बना दिया गया. 76 साल के आज़म खान कई बीमारियों से जूझ रहे हैं, उनकी पत्नी और पूर्व सांसद तंजीम फातिमा, बेटे अब्दुल्ला आजम भी उनके साथ लंबे वक्त तक जेल में रह चुके हैं. हालांकि मई 2022 में वो जेल से बाहर आए थे, लेकिन तब भी पार्टी की बेरुखी ने उनका दिल तोड़ दिया था, करीब साल भर बाद उनको फिर जेल जाना पड़ा.

इसके बाद से आजम खान और समाजवादी पार्टी के बीच तल्खियां बढ़ती चली गईं, लेकिन आजम खान ने अपनी जुबान से कभी कुछ नहीं कहा. अब पत्नी और बेटे के जेल से बाहर आने के बाद आजम खान के भी अच्छे दिन आने वाले हैं, लेकिन पार्टी की बेरुखी एक बार फिर चर्चा में है. गाहे बगाहे पार्टी की तरफ से कहा जाता है कि आजम खान उनके हैं और कहीं नहीं जाएंगे, लेकिन आजम खान ने कभी इस बात को अपने मुंह से नहीं कहा, इसी वजह से सियासी बाजार में नई खबरें तेजी से फैल रहीं हैं.

आजम खान कहां जाएंगे या समाजवादी पार्टी में ही रहेंगे इस पर अभी पर्दा ही पड़ा है, लेकिन पश्चिमी यूपी की बात करें तो यहां 70 विधानसभा और 14 लोकसभा सीटें हैं, जिसमें रामपुर समेत 8 मुस्लिम बहुल जिले हैं. सिर्फ मुरादाबाद मंडल की ही बात की जाए तो यहां अकेले 27 विधानसभा सीटें हैं, ये एक बड़ा नंबर है. अगर समाजवादी पार्टी का दामन आजम खान ने छोड़ दिया तो पार्टी को मुस्लिम बहुल सीटों पर अच्छा खासा नुकसान हो सकता है. जाहिर है ये वो इलाके हैं जहां आजम खान का अच्छा असर माना जाता है.

अगर मान लिया जाए कि बाकी यूपी में आजम खान का कोई जनाधार नहीं भी बचा है, तो पश्चिमी यूपी से ही वो समाजवादी पार्टी को अच्छा खासा नुकसान पहुंचा सकते हैं. कुछ नहीं तो कम से कम मुस्लिम वोट को बांट कर सीटें तो हरवा तो सकते ही हैं. लेकिन समाजवादी पार्टी के नेता शायद इस बात से बेखबर हैं कि यूपी की कुल 403 सीटों में से करीब 143 सीटें ऐसी हैं जो मुस्लिम बहुल हैं, इनमें 68 सीटों परम मुस्लिम वोटर 35 से 70 प्रतिशत के बीच है. ऐसे में एक कद्दावर मुस्लिम नेता से पार्टी की दूरी कहीं उसके लिए भारी ना पड़ जाए.