यूपी समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों को लेकर बडी खबर-जानें विस्तार से

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष तय समय पर होंगे। चुनाव आयोग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि विधानसभा चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें तय समय सीमा के भीतर कराना अनिवार्य है। ऐसे में जनगणना का कार्यक्रम चुनाव में बाधा नहीं बनेगा।

उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों की विधान सभाओं का कार्यकाल अगले वर्ष मार्च से मई के बीच समाप्त हो रहा है। उत्तर प्रदेश विधान सभा का कार्यकाल अगले वर्ष 22 मई तक है, जबकि उत्तराखंड का 28 मार्च, पंजाब 16 मार्च, गोवा 14 मार्च और मणिपुर का कार्यकाल 13 मार्च को समाप्त हो रहा है।

परंपरागत रूप से इन राज्यों में विधान सभा चुनाव फरवरी-मार्च के दौरान कराए जाते रहे हैं। इस बार चुनाव कार्यक्रम को लेकर इसलिए संशय पैदा हुआ क्योंकि केंद्र सरकार ने अगले वर्ष एक से 28 फरवरी के बीच जनगणना के तीसरे चरण का कार्यक्रम तय किया है। इस चरण में गणनाकर्मी घर-घर जाकर लोगों की गणना करेंगे। ऐसे में दोनों प्रक्रियाओं के एक साथ होने को लेकर सवाल उठाते जा रहे थे।

नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट में चुनाव आयोग द्वारा शुक्रवार को पहली बार आयोजित अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन-2026 के दौरान बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि विधान सभा चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया है, जबकि जनगणना कानूनी प्रक्रिया है।

संवैधानिक दायित्व को प्राथमिकता दी जाएगी और उत्तर प्रदेश सहित सभी राज्यों में संबंधित विधान सभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव करा लिए जाएंगे। यदि जरूरत पड़ी तो जनगणना के कार्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

दरअसल, जनगणना के कार्यक्रम के मद्देनजर चर्चा यह थी कि विधान सभा के चुनाव समय से पहले इसी वर्ष कराए जा सकते हैं लेकिन शुक्रवार को चुनाव आयोग के रुख से साफ संकेत है कि उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में विधान सभा चुनाव अब तय समय पर ही कराने की तैयारी है।

फरवरी-मार्च में होते रहे चुनाव
उत्तर प्रदेश विधानसभा के पिछले दो चुनावों के कार्यक्रम को देखें तो साफ है कि फरवरी-मार्च में ही चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाती रही है। वर्ष 2017 में मतदान फरवरी व मार्च में हुए थे। चुनाव परिणाम 11 मार्च को घोषित किया गया था। वर्ष 2022 के विधान सभा चुनाव की अधिसूचना आठ जनवरी को हुई थी।

मतदान सात चरणों में 10 फरवरी से सात मार्च के बीच हुए थे। परिणाम 10 मार्च को घोषित किए गए थे। ऐसे में उम्मीद है कि 19वीं विधानसभा के लिए भी फरवरी-मार्च के दौरान ही चुनाव कराए जा सकते हैं। अधिसूचना जनवरी में हो सकती है। चूंकि अधिसूचना जारी होते ही चुनाव आचार संहिता लागू हो जाती है इसलिए राज्य सरकार विकास के तमाम कार्य 31 दिसंबर तक ही करा लेना चाहती है।

चुनाव आयोग ने मीडिया सम्मेलन में कहा कि देश की करीब 95 करोड़ मतदाताओं वाली मतदाता सूची एक ‘जीवंत दस्तावेज’ है, जिसे लगातार अद्यतन किया जाता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि मतदाता सूची तैयार करने और उसकी निगरानी में 12 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) और 15 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट (बीएलए ) समवर्ती आडिटर के रूप में काम कर रहे हैं।

भारत में चुनाव संविधान, जनप्रतिनिधित्व कानून और निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप पूरी पारदर्शिता के साथ कराए जाते हैं। सम्मेलन में देशभर से 380 से अधिक मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया है।