हर महान सभ्यता के इतिहास में एक ऐसा क्षण आता है जब उसके लोग सामूहिक रूप से यह तय करते हैं कि पिछड़ेपन की पहचान अब स्वीकार्य नहीं. उत्तर प्रदेश के लिए वह क्षण मार्च 2017 में आया, जब योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. यह महज़ एक सरकार का बदलाव नहीं था, यह उत्तर प्रदेश के इरादे का बदलाव था. नौ साल बाद, जब वे 2027 के विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहे हैं, यह स्पष्ट हो चुका है कि योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं जिनके पास विजन भी है, प्रशासनिक कौशल भी है और उस विजन को ज़मीन पर उतारने की राजनीतिक इच्छाशक्ति भी. प्रदेश का आर्थिक कायापलट अब केवल राजनीतिक वायदा नहीं, यह एक दस्तावेजी सच्चाई है, जिसे नीति आयोग ने प्रमाणित किया है. ज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने स्वीकार किया है और फरवरी 2026 में विधानसभा में पेश उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक पहले इकोनॉमिक सर्वे ने अभिलेखबद्ध किया है.
उस इकोनॉमिक सर्वे के आंकड़े किसी भी ऐतिहासिक कसौटी पर असाधारण हैं. राज्य की जीडीपी 2016-17 के 13.30 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 30.25 लाख करोड़ रुपये हो गई है, 10.8 फीसद की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर). 2023-24 में जब देश की जीडीपी 9.6 फीसद की दर से बढ़ी, तब उत्तर प्रदेश ने 11.6 फीसद की दर से राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ा. प्रदेश देश की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से उठकर दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है. 2026-27 का बजट 9.12 लाख करोड़ रुपये का है, यानी 2017 में मिले बजट का तीन गुना. यह ग्रोथ अपने आप नहीं हुई, यह योगी आदित्यनाथ के उस गवर्नेंस मॉडल का परिणाम है जो जवाबदेही, प्रौद्योगिकी और क्रियान्वयन को एकसाथ जोड़ता है.
बाहरी सत्यापन और भी ठोस है. नीति आयोग के फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2025 में उत्तर प्रदेश को 18 प्रमुख राज्यों में सातवां स्थान मिला और वह ‘फ्रंट-रनर’ श्रेणी में पहुंचा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के साथ. नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उत्तर प्रदेश ने 2018 के बाद से सभी राज्यों में सर्वाधिक सुधार दर्ज किया- 25 अंकों की ऐतिहासिक छलांग. क्लीन एनर्जी के एसडीजी गोल 7 में प्रदेश को 100 में से 100 अंक मिले, देश का एकमात्र ऐसा राज्य जिसने अप्रैल 2024 तक प्रत्येक घर में बिजली पहुंचाई. ये आंकड़े कोई सरकार नहीं गढ़ सकती. यह भारत की शीर्ष नीति-संस्था का प्रमाणपत्र है. यह प्रमाणपत्र सीधे सीएम योगी के उस डैशबोर्ड-ड्रिवन गवर्नेंस का परिणाम है जिसमें हर विभाग की प्रोग्रेस हर महीने रिव्यू होती है, हर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर जवाबदेह है और हर स्कीम की डिलीवरी की रियल-टाइम मॉनिटरिंग होती है.
‘योगीनॉमिक्स’ से होता यूपी का कायाकल्प
इस कायापलट की जड़ में जो गवर्निंग फिलॉसफी है, उसे विश्लेषक ‘योगीनॉमिक्स’ कहने लगे हैं. इसकी वैचारिक सुसंगति ही योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश के पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों से अलग करती है. उनकी बुनियादी स्थापना सरल किन्तु क्रांतिकारी है: कानून और व्यवस्था केवल एक प्रशासनिक ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि आर्थिक विकास की अनिवार्य पूर्व शर्त है. निवेशक के आने से पहले, कारखाने खड़े होने से पहले, सप्लाई चेन बनने से पहले, राज्य को यह भरोसा दिलाना होगा कि वह जन और धन की रक्षा करेगा. सीएम योगी ने यह भरोसा दिलाया: डकैती में 85 फीसद की कमी, हत्याओं में 41 फीसद की गिरावट, क्राइम रेट अब राष्ट्रीय औसत से नीचे. आपराधिक गिरोहों से 4,076 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति मुक्त कराई गई.’एक जिला,एक माफिया’ की कलंक-पहचान को जानबूझकर ‘एक जिला,एक उत्पाद’ से बदला गया. यह बदलाव सीएम योगी के उस नेतृत्व का प्रतीक है जो प्रतीक और सार दोनों को एक साथ साधता है.