लखनऊ। बंटवारे और पाकिस्तान से युद्ध के बाद जो लोग देश छोड़कर चले गए अब उनकी संपत्तियां सरकार के लिए कुबेर का खजाना बन रही हैं। शत्रु संपत्ति संरक्षक विभाग उत्तर प्रदेश में पहले चरण में इस तरह की एक हजार संपत्तियों की आनलाइन नीलामी करेगा।
इनमें से करीब चार सौ संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया पूरी भी हो चुकी है, जिससे सरकार को 200 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है।
इस वर्ष के अंत तक शेष संपत्तियों की नीलामी पूरी करने की योजना है, जिससे आठ सौ करोड़ रुपये और आय का अनुमान है। भविष्य में इस तरह की अन्य तीन हजार संपत्तियों की नीलामी की योजना है।
गृह मंत्रालय के निर्देश पर देश में अब तक करीब 13 हजार शत्रु संपत्तियां घोषित कर सरकार अपनी कस्टडी में ले चुकी है। उत्तर प्रदेश में करीब साढ़े छह हजार संपत्तियां अब तक चिह्नित की गई हैं।
अभी भी हजारों संपत्तियां ऐसी हैं, जिनके मालिकाना हक को लेकर केंद्र सरकार और कब्जेदारों के बीच विभिन्न अदालतों में मुकदमे लंबित हैं। दो वर्ष पूर्व केंद्र सरकार ने शत्रु संपत्तियों को नीलाम करने का निर्णय लिया था।
नीलामी में उन संपत्तियों को शामिल किया गया है, जो विभाग के लिए निष्प्रयोज्य थीं और अधिकांश पर अतिक्रमण था। भविष्य में इन संपत्तियों पर भी कब्जेदारी को लेकर किसी तरह का विवाद न रहे और राजस्व भी मिल जाए, इसे देखते हुए नीलामी शुरू की गई।
शत्रु संपत्ति विभाग के यूपी कार्यालय के अनुसार इस ई नीलामी प्रक्रिया में कोई भी शामिल हो सकता है हालांकि कब्जेदारों को प्राथमिकता रहेगी।
ग्रामीण क्षेत्र में जिन शत्रु संपत्तियों का मूल्य एक करोड़ और शहरी क्षेत्र में पांच करोड़ रुपये तक अनुमानित है उन पर अगर कोई कब्जेदार है तो पहले उसे खरीद का प्रस्ताव दिया जाएगा। अगर कब्जेदार संपत्ति खरीदने में असमर्थ है तो फिर नीलामी प्रक्रिया से उसका निर्धारण किया जाएगा।
राजा महमूदाबाद की संपत्तियां नीलामी में शामिल नहीं
राजा महमूदाबाद की संपत्तियां लखनऊ सहित देशभर में हैं। आजादी के बाद राजा महमूदाबाद अमीर अहमद खान इराक चले गए और वहां से 1957 में पाकिस्तान जाकर बस गए।
इसके बाद वह लंदन गए, जहां उनकी मौत हो गई। राजा के निधन के बाद उनके बेटे लंदन से लौटे और संपत्तियों पर दावा ठोंका। सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है, इसलिए अगले आदेश तक उनकी संपत्तियों से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।
लखनऊ में हैं दो सौ से अधिक संपत्तियां
हजरतगंज से लेकर मलिहाबाद तक राजा महमूदाबाद की संपत्तियां हैं। इनमें बटलर पैलेस, हलवासिया मार्केट, मलका जमनिया इमामबाड़ा, लारी बिल्डिंग, जनपथ आदि प्रमुख हैं।
इसके अलावा क्ले स्क्वायर स्थित हैदरी बेगम हवेली, अमीनाबाद स्थित वारसी बिल्डिंग, अस्तबल चारबाग में सिद्दीकी बिल्डिंग, मौलवीगंज स्थित लाल कोठी, गोलागंज और बुलंदबाग में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां, कैसरबाग हाता, गोलागंज स्थित लाल कोठी, चौक में कनीज सईदा बेगम पुरानी बाड़ी खाना कोठी, अब्दुल लतीफ खां का हाता, अब्दुल खलीम की नौबस्ता स्थित पुरानी इमारत और तिलक मार्ग पर शत्रु संपत्तियां हैं।