एसआईआर पर ओवर कॉन्फिडेंस ने बीजेपी को मुश्किल में डाल दिया है. अपने वोटरों के नाम कटने की आशंका से बीजेपी में बेचैनी है. पार्टी के कार्यकर्ता से लेकर सूबे के मुख्यमंत्री तक सार्वजनिक मंच से अपनी आशंका जाहिर कर रहे हैं. डेडलाइन पूरी होने में महज 10 दिन बचे हैं और अभी भी 15 से 20% मतदाताओं के एसआईआर फॉर्म जमा नहीं हुए हैं. सीएम योगी ने कार्यकर्ताओं से लेकर सभी विधायकों और मंत्रियों तक को युद्धस्तर पर ज़्यादा से ज़्यादा मतदाताओं के फॉर्म पूरे करा कर जमा कराने का निर्देश दिया है.
उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया ने राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है. पहले 15.44 करोड़ मतदाताओं वाली सूची अब SIR के दौरान करीब 12 करोड़ तक सिमटती दिख रही है, जिससे लगभग 4 करोड़ नाम ‘गायब’ हो गए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इसे बीजेपी के लिए बड़ा झटका बताया.
उनका दावा है कि इनमें से 85-90% बीजेपी समर्थक हैं, खासकर शहरी क्षेत्रों के. वहीं, विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है. यह प्रक्रिया मृतकों, डुप्लीकेट एंट्री, स्थानांतरित और अनुपस्थित वोटरों की सफाई का हिस्सा है लेकिन इसके पीछे की वजहें और प्रभाव 2027 विधानसभा चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं.
इस वजह से शहरी वोटर लिस्ट में आई भारी कमी
लखनऊ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बनारस, गोरखपुर कानपुर, गोरखपुर, जैसे शहरों में दूसरे जिलों से आए लोग बस गए थे और वहीं के वोटर बन गए थे. SIR के बाद एक ही जगह वोटर आईडी का नियम सख्ती से लागू होने पर कई लोगों ने अपने मूल जिले स्थान पर SIR फॉर्म भरा, जिससे शहरी वोटर लिस्ट में भारी कमी आई है. शहरी क्षेत्र बीजेपी का मजबूत आधार माने जाते हैं, इसलिए यह कमी पार्टी के लिए बड़ा झटका बन रही है.
शहरी मतदाता SIR को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं दिखे, जबकि अगर फॉर्म सबमिट नहीं किया तो नाम सूची से कट जाता है. बीजेपी का मानना है कि समाजवादी पार्टी SIR को लेकर ज्यादा अलर्ट रही, जिससे उसके समर्थकों ने समय पर फॉर्म जमा कर दिए, जबकि बीजेपी कार्यकर्ता उतने सक्रिय नहीं रहे. संशोधन प्रक्रिया में मृतकों के नाम हटाए जा रहे हैं. डुप्लीकेट एंट्री साफ की जा रही है और डबल जगह वाले वोटरों का नाम एक ही स्थान पर रखा जा रहा है.
एक और महत्वपूर्ण वजह समुदायिक है. बीजेपी सूत्रों के अनुसार, मुस्लिम वोटरों ने नागरिकता संबंधी आशंकाओं और सरकारी योजनाओं के लाभ के चलते जल्दी फॉर्म सबमिट कर दिए, जबकि हिंदू समर्थकों में वैसी उत्सुकता नहीं रही. योगी आदित्यनाथ ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है कि बूथ स्तर पर सक्रिय होकर योग्य वोटरों के नाम जोड़वाएं, ताकि 2027 में नुकसान न हो. यह SIR सिर्फ सूची सफाई नहीं, बल्कि यूपी की राजनीति का नया मोड़ साबित हो सकता है.