यूपी सरकार पर 50 हजार का जुर्माना, बिजनौर पुलिस की दहेज केस में लापरवाही पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का कड़ा कदममामला बिजनौर जिले के चांदपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां पुलिस की उदासीनता के कारण कोर्ट की कार्यवाही बाधित हुई. इसके बाद कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की घोर लापरवाही और ढुलमुल रवैये के कारण एक जमानत याचिका के निस्तारण में हुई दस दिन से अधिक की देरी पर बेहद सख्त रुख अपनाया है. जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल बेंच ने इस लापरवाही के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पर पचास हजार रुपए का हर्जाना लगाया है. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यह राशि सीधे तौर पर याचिकाकर्ताओं को पुलिस की लापरवाही के कारण भुगतान की जाए. हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को यह छूट भी दी है कि वह जांच कराने के बाद दोषी पुलिसकर्मियों से इस राशि की वसूली कर सकती है.
पूरा मामला बिजनौर जिले के चांदपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां पुलिस की उदासीनता के कारण कोर्ट की कार्यवाही बाधित हुई. कोर्ट दहेज मृत्यु के एक मामले में आरोपी याचिकाकर्ता यासीन और सबीला की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही थी जो भारतीय न्याय संहिता की धारा 85, 80(2) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत जेल में बंद थे. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि मृतका को मौत से ठीक पहले दहेज की मांग के लिए प्रताड़ित किया गया था.
पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
इसके अलावा स्वतंत्र गवाहों और रिश्तेदारों के बयानों से भी यह स्पष्ट हुआ कि पति-पत्नी के बीच केवल सामान्य घरेलू विवाद चल रहा था. इन परिस्थितियों और सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के स्थापित दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने दोनों बुजुर्ग आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और इस बात पर जोर दिया कि जमानत अर्जी पर फैसला तीन जुलाई 2026 को ही हो सकता था, लेकिन केवल पुलिस अधिकारियों की गैर-जिम्मेदाराना हरकत की वजह से यह मामला टलता रहा.
17 जून से शुरू हुआ लापरवाही का सिलसिला
लापरवाही का सिलसिला 17 जून 2026 को शुरू हुआ, जब हाईकोर्ट के संयुक्त निदेशक (अभियोजन) कार्यालय द्वारा पुलिस पैरोकार को जमानत याचिका की प्रति सौंपी गई थी. इसके बाद आवश्यक निर्देश और केस डायरी उपलब्ध कराने के लिए 19 जून 2026 को पुलिस अधीक्षक बिजनौर को पहला अलर्ट पत्र भेजा गया. बार-बार अनुरोध के बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला तो 29 जून 2026 को एक और पत्र भेजा गया.