चमोली: उत्तराखंड में मानसून सीजन के दौरान रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई, ऐसे में यह अनुमान लगाया गया था कि सर्दियों में राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी देखने को मिलेगी, लेकिन दिसंबर का आधे से ज्यादा महीना बीतने के बावजूद न तो औली और ना ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है और न ही बारिश. इसी बीच जनवरी 2026 में औली में नेशनल विंटर गेम्स का आयोजन प्रस्तावित है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि पर्यटन विभाग पूरी तरह मौसम के भरोसे बैठा नजर आ रहा है. सवाल यह है कि अगर बर्फ नहीं गिरी तो क्या विंटर गेम्स हो पाएंगे? और अगर आयोजन संकट में पड़ा तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
पूरे देश में अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने वाला एकमात्र आउटडोर स्कीइंग स्लोप औली है. इसी वजह से उत्तराखंड को नेशनल विंटर गेम्स की मेज़बानी मिली है. उत्तराखंड विंटर गेम्स एसोसिएशन अब तक औली में 35 नेशनल विंटर गेम्स और वर्ष 2011 में साउथ एशियन विंटर गेम्स का सफल आयोजन कर चुका है. औली आइस स्लोप को वर्ष 2010 में FIS यानी इंटरनेशनल स्की एंड स्नोबोर्ड फेडरेशन से मान्यता मिली थी, जो वर्ष 2029 तक वैध है.
औली विंटर गेम्स में 3000 खिलाड़ी लेते हैं हिस्सा
उत्तराखंड विंटर गेम्स एसोसिएशन के सचिव अजय भट्ट का कहना है कि यह राज्य के लिए गर्व की बात है कि एक बार फिर औली को नेशनल विंटर गेम्स की मेज़बानी मिली है. उन्होंने बताया कि इस आयोजन में देशभर से करीब 300 खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं, जिनमें भारतीय सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ और आईटीबीपी के खिलाड़ी भी शामिल होते हैं.
तैयारियों को लेकर पर्यटन विभाग नहीं गंभीर- अजय भट्ट
उत्तराखंड विंटर गेम्स एसोसिएशन के सचिव अजय भट्ट कहा कि विंटर गेम्स जैसे बड़े राष्ट्रीय आयोजन के लिए महीनों पहले से तैयारियां शुरू करनी होती हैं, जिसमें पर्यटन विभाग और औली में मौजूद गढ़वाल मंडल विकास निगम की अहम भूमिका होती है. लेकिन इस बार न तो पर्यटन विभाग और न ही जीएमवीएन की ओर से कोई ठोस तैयारी या गंभीरता दिखाई दे रही है. आयोजन को लेकर समय रहते सूचना देने के बावजूद विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. जब कोई नेशनल इवेंट उत्तराखंड में होता है, तो उस पर देश-विदेश की निगाहें रहती हैं, लेकिन इस बार विभागीय उदासीनता सवाल खड़े कर रही है.
मौसम ने भी बढ़ाई चिंता
एक तरफ विंटर गेम्स एसोसिएशन पर्यटन विभाग की ओर उम्मीद लगाए बैठा है, तो दूसरी तरफ मौसम भी चिंता बढ़ा रहा है. जहां कभी इन दिनों बर्फ पड़ती थी वहां अभी धूल उड़ रही है और मौसम शुष्क है.
मौसम विभाग के अनुसार जनवरी और फरवरी में उत्तराखंड में सामान्य से कम बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है. इसका कारण पश्चिमी विक्षोभों की संख्या और उनकी तीव्रता में कमी बताया जा रहा है. मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक के अनुसार सीजनल फोरकास्ट पहले ही संकेत दे चुका है कि इस बार बर्फबारी सामान्य से कम रह सकती है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या पर्यटन विभाग ने इस चेतावनी को गंभीरता से लिया है?
कृत्रिम बर्फ मशीन 2018 से बंद
ऐसे में अगर जनवरी में बर्फबारी नहीं हुई, तो नेशनल विंटर गेम्स पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं. औली में आर्टिफिशियल स्नो मेकिंग मशीन मौजूद है, लेकिन यह मशीन वर्ष 2018 से बंद पड़ी है. जबकि मौजूदा समय में औली का तापमान माइनस में बना हुआ है, जो कृत्रिम बर्फ बनाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. उत्तराखंड विंटर गेम्स एसोसिएशन का कहना है कि अगर पर्यटन विभाग और जीएमवीएन समय रहते इस सिस्टम को चालू कर देते, तो न सिर्फ नेशनल विंटर गेम्स कराए जा सकते थे, बल्कि न्यू ईयर और क्रिसमस के दौरान पर्यटन को भी बड़ा फायदा मिलता, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने अहम नेशनल इवेंट के बावजूद विभागीय स्तर पर अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है.
मौसम के भरोसे बैठे रहना कितना ठीक
जब औली जैसी प्रतिष्ठित FIS अप्रूव्ड लोकेशन मौजूद है, आर्टिफिशियल स्नो की सुविधा उपलब्ध है? और नेशनल इवेंट की जिम्मेदारी भी पर्यटन विभाग के पास है, तो फिर विभाग सिर्फ मौसम के भरोसे क्यों बैठा है? अगर समय रहते स्नो मेकिंग सिस्टम को चालू नहीं किया गया, तो न सिर्फ नेशनल विंटर गेम्स बल्कि उत्तराखंड की पर्यटन छवि को भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.