थर्ड ग्रेड शिक्षकों के ट्रांसफर पर मंत्री के जवाब से बढ़ी बेचैनी, विपक्ष ने पूछा- कब आएगा नंबर?

जयपुर: राजस्थान विधानसभा में एक बार फिर तबादलों का ‘भूत’ जाग उठा है। प्रदेश के करीब 2 लाख से ज्यादा थर्ड ग्रेड शिक्षकों के भविष्य और तबादलों के इंतजार को लेकर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त जुबानी जंग देखने को मिली। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने साफ कर दिया कि जब तक ‘तबादला नीति’ का ड्राफ्ट फाइनल नहीं हो जाता, तब तक शिक्षकों को अपने जिलों में लौटने के लिए और इंतजार करना होगा।

‘पॉलिसी’ के पेंच में फंसे 2 लाख शिक्षक
विधानसभा में भाजपा विधायक गोविंद प्रसाद ने जब थर्ड ग्रेड शिक्षकों के तबादलों का सवाल उठाया, तो शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने दो-टूक जवाब दिया। दिलावर ने कहा, ‘प्रशासनिक सुधार विभाग ने तबादलों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है। फिलहाल शिक्षा विभाग एक पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी बनाने की प्रक्रिया में जुटा है। जब तक यह नीति सक्षम स्तर से अनुमोदित नहीं हो जाती, तब तक तबादलों पर विचार करना संभव नहीं है।’ मंत्री के इस बयान ने उन हजारों शिक्षकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया जो बरसों से ‘डार्क जोन’ और दूर-दराज के जिलों से अपने घर वापसी की राह देख रहे थे।

नेता प्रतिपक्ष जूली ने घोषणा पत्र याद दिलाया
शिक्षा मंत्री के जवाब पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली उखड़ गए। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में तबादला नीति लाने का वादा किया था। जूली ने सवाल दागा, ‘सरकार को आए सवा दो साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। आधा कार्यकाल खत्म होने को है, लेकिन आपकी ‘पॉलिसी’ अब तक कागजों से बाहर नहीं आई। क्या आप प्रदेश के सबसे बड़े काडर को केवल गुमराह कर रहे हैं?’

2018 का हवाला और तीखी नोकझोंक
विपक्ष के हमले पर मदन दिलावर ने पलटवार करते हुए कांग्रेस के पिछले शासनकाल पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2018 में हमारी सरकार ने 2200 से ज्यादा तबादले किए थे। कांग्रेस राज में तो एक भी थर्ड ग्रेड शिक्षक का तबादला नहीं हुआ, तब आपको किसने रोका था? दिलावर ने स्पष्ट किया कि थर्ड ग्रेड शिक्षकों के अंतर-जिला तबादलों का कोई सीधा प्रावधान नहीं होता है, क्योंकि इससे वरिष्ठता प्रभावित होती है। पिछली बार अंडरटेकिंग लेकर रास्ता निकाला गया था, लेकिन अब स्थायी नीति ही एकमात्र समाधान है।

सबसे बड़ा कैडर, सबसे लंबा इंतजार
शिक्षा विभाग में थर्ड ग्रेड शिक्षकों की संख्या 2 लाख से अधिक है। इनमें से हजारों शिक्षक ऐसे हैं जो पिछले 5 से 10 वर्षों से अपने गृह जिले से सैकड़ों किलोमीटर दूर सेवाएं दे रहे हैं। तबादला नीति के नाम पर मचे इस सियासी घमासान के बीच पिसना उन शिक्षकों को पड़ रहा है, जो अब उम्मीद हारते नजर आ रहे हैं।