हिमाचल का कर्ज 98 हजार करोड़ के पार; ढाई साल में सरकार ने कितना लिया लोन?

Himachal's debt crosses 98 thousand crores; How much loan did the government take in two and a half years?
Himachal's debt crosses 98 thousand crores; How much loan did the government take in two and a half years?

शिमला: हिमाचल प्रदेश पर लगातार बढ़ता कर्ज एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। विधानसभा में मंगलवार को पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति की जानकारी दी। भाजपा विधायकों डॉक्टर जनक राज (भरमौर) और लोकेन्द्र कुमार (आनी) द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने साफ किया कि हिमाचल प्रदेश पर 31 जुलाई 2025 तक कुल 98,182 करोड़ रुपये का कर्ज है।

एक लाख करोड़ को पार कर जाएगा कर्ज
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यह भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले महीनों में यह आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये को पार कर जाएगा। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में कर्ज के मूलधन की अदायगी के लिए 4243.57 करोड़ रुपये और ब्याज चुकाने के लिए 6738.85 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान कर्ज के पुनर्भुगतान कार्यक्रम के आधार पर अनुमानित है।

प्रदेश के अपने संसाधन सीमित
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यह भी माना कि हिमाचल प्रदेश के अपने संसाधन सीमित हैं। खर्चों के लिए प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार पर काफी हद तक निर्भर रहना पड़ता है। 1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद प्रदेश की केंद्र पर निर्भरता और भी ज्यादा बढ़ गई है। जीएसटी के कारण राज्य सरकार की ओर से वसूले जाने वाले कई कर समाप्त हो गए और इन्हें केंद्र में समाहित कर दिया गया।

बढ़ गया दबाव
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आगे कहा कि इससे हिमाचल को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई केंद्र सरकार ने शुरुआती 5 वर्षों तक की लेकिन 1 जुलाई 2022 के बाद यह राशि मिलनी बंद हो गई। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर दबाव और बढ़ गया है। 15वें वित्त आयोग ने हिमाचल को राजस्व घाटा अनुदान (रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट) की सिफारिश की थी।

जीएसटी से हुए घाटे का दिया हवाला
सीएम ने बताया कि वित्त आयोग के पहले वर्ष 2020-21 में हिमाचल को इसके तहत 11,431 करोड़ रुपये मिले थे। लेकिन आने वाले वर्षों में यह राशि लगातार कम होती चली गई और अंतिम वर्ष 2025-26 के लिए यह घटकर मात्र 3,257 करोड़ रुपये रह गई। जीएसटी से हुए घाटे और राजस्व घाटा अनुदान में कमी ने मिलकर राज्य को और कर्ज पर निर्भर कर दिया।

ढाई वर्षों में इतना लिया कर्ज
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि बीते ढाई वर्षों में प्रदेश सरकार ने विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से कुल 26,830.71 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। इसमें से अकेले 20,350 करोड़ रुपये खुले बाजार से उठाए गए हैं। वहीं इस दौरान सरकार ने 8,253.94 करोड़ रुपये का कर्ज वापस भी किया है। इस प्रकार शुद्ध तौर पर प्रदेश पर 18,576.77 करोड़ रुपये का नया कर्ज चढ़ा है।

2,941.89 करोड़ रुपये का कर्ज लिया
मुख्यमंत्री सुक्खू ने यह भी बताया कि उपरोक्त कर्ज के अतिरिक्त राज्य सरकार पर लोक लेखा के अंतर्गत सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) और अन्य मदों से भी शुद्ध कर्ज बनता है। 1 अप्रैल 2023 से 30 जून 2025 तक इस मद के अंतर्गत 2,941.89 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया है।

भाजपा लगातार बोल रही हमले
बता दें कि विपक्षी दल भाजपा पहले ही सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार पर लगातार कर्ज लेने और वित्तीय प्रबंधन में कमी के आरोप लगाती रही है। अब विधानसभा में पेश हुए इस आधिकारिक आंकड़े से यह साफ हो गया है कि आने वाले महीनों में हिमाचल पर कर्ज का बोझ एक लाख करोड़ रुपये के पार चला जाएगा।