शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव के लिए मैदान सजना शुरू हो गया है। चुनाव की तिथि घोषित होने से पहले ही गांव से लेकर शहरों तक राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। संभावित प्रत्याशियों ने चुनाव मैदान में उतरने से पहले ही चुनावी बिसात पर रणनीति बनाकर चाल चलनी शुरू कर दी है। जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रचार कर लोकलुभावन वादे किए जा रहे हैं।
आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद संभावित प्रत्याशियों ने घर-घर जाकर संपर्क अभियान तेज कर दिया है। इंटरनेट मीडिया के साथ पारंपरिक जनसंपर्क के जरिये भी उपस्थिति दर्ज करवाई जा रही है। आने वाले दिनों में ये गतिविधियां तेज होने की संभावना है। कई संभावित उम्मीदवार अभी से अपने वार्डों में बैठकें कर स्थानीय समस्याओं को प्राथमिकता से दूर करने का भरोसा दिला रहे हैं।
न्यायालय के आदेश अनुसार तैयारियां तेज
सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदेश में 31 मई से पहले स्थानीय निकाय चुनाव करवाना अनिवार्य किया है। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां तेज की जा रही हैं। मतदाता सूची अपडेट करने और वार्डस्तर पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की प्रक्रिया जारी है।
सर्वे के आधार पर प्रत्याशी चयन
राजनीतिक दलों की ओर से भी उम्मीदवारों का चयन सर्वे के आधार पर किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक रूप से चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं हुई है लेकिन माहौल चुनावी रंग में रंग गया है।
ये हो रहे वादे
मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए सड़कों की हालत सुधारने, पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने, बिजली आपूर्ति बेहतर करने और सफाई व्यवस्था मजबूत बनाने, कचरा प्रबंधन जैसे वादे किए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं प्रमुख मुद्दा है। वहीं, शहरी निकायों में यातायात, पार्किंग, कचरा प्रबंधन और विकास कार्यों को लेकर चुनावी चर्चा गर्म है।