होर्मुज पर ईरान से आई गुड न्यूज, अरागची बोले- हम अमेरिका से डील के बेहद करीब

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर जल्द ही समझौता होने वाला है. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने सरकारी टीवी से बातचीत में कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है. उन्होंने बताया कि प्रस्तावित समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना शामिल है. हालांकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत बातचीत बाद में होगी.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने ईरान पर होने वाले नए हमले रद्द कर दिए हैं, क्योंकि बातचीत में बड़ी प्रगति हुई है और जल्द ही समझौते पर दस्तखत हो सकते हैं. शुक्रवार को ईरानी मीडिया में 14 पॉइंट वाले समझौते की खबरें भी सामने आईं. हालांकि ट्रंप ने इन रिपोर्टों को गलत बताते हुए कहा कि इन शर्तों का असली समझौते से कोई नाता नहीं है.

समझौते पर ऑनलाइन साइन किए होंगे
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता के डॉक्यूमेंट (MOU) पर सहमति बन चुकी है और अब सिर्फ अंतिम मंजूरी बाकी है. पाकिस्तान और कतर इस पूरी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं.

ईरान के विदेश मंत्री अरागची ने कहा कि देश की सुप्रीन नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में इस समझौते को लेकर अलग-अलग राय हैं. कुछ लोग इसके पक्ष में हैं तो कुछ विरोध में. इसलिए अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. अगर मंजूरी मिलती है तो समझौते पर ऑनलाइन साइन किए जाएंगे.

60 दिन परमाणु कार्यक्रम पर होगी बात
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, समझौते के बाद सबसे पहले होर्मुज स्ट्रेट खोला जाएगा और ईरानी जहाजों पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी हटाई जाएगी. इसके बाद 60 दिनों तक परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत होगी. इस दौरान ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को नष्ट करने और देश से बाहर ले जाने की योजना पर काम किया जाएगा.

अमेरिका ने साफ किया है कि ईरान को कोई पैसा या आर्थिक राहत पहले से नहीं दी जाएगी. प्रतिबंधों में ढील और जमी हुई संपत्तियों की रिहाई स्टेप बाय स्टेप होगी. यानी ईरान जितनी शर्तें पूरी करेगा, उसे उतना ही आर्थिक लाभ मिलेगा.

हिज्बुल्लाह की मदद रोकने की शर्त
समझौते में यह भी कहा गया है कि ईरान को हिज्बुल्लाह और क्षेत्र के अन्य सहयोगी सशस्त्र समूहों को सहायता देना बंद करना होगा. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता सिर्फ वादों पर नहीं, बल्कि वास्तविक कार्रवाई और उसकी जांच पर आधारित होगा. अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर सभी इस समझौते को लेकर सकारात्मक दिख रहे हैं, लेकिन अभी अंतिम मंजूरी बाकी है.