आठ मौतों के गुनहगारों के चेहरे आए सामने: फिरोज, वसीम और अकील की भूमिका जांच में उजागर

जयपुर. जयपुर के खोह नागोरियान इलाके में हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री विस्फोट, जिसमें आठ लोगों की जान चली गई थी, मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ अवैध पटाखा कारोबार के कई चेहरे बेनकाब हो रहे हैं। दैनिक भास्कर द्वारा पहले याकूब और कय्यूम की पहचान और उनके आलीशान ठिकानों का खुलासा किए जाने के बाद अब इस हादसे के अन्य जिम्मेदार आरोपियों की भी पहचान सामने आई है। पुलिस की जांच में फिरोज, वसीम और अकील की भूमिका प्रमुख रूप से सामने आई है, जबकि पूरे क्षेत्र में फैले अवैध पटाखा निर्माण नेटवर्क के चौंकाने वाले तथ्य भी उजागर हुए हैं।

फिरोज पर मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप

पुलिस के अनुसार दिल्ली निवासी फिरोज ने उस मकान को किराये पर ले रखा था, जहां बारूद और पटाखा निर्माण का काम किया जा रहा था और जहां विस्फोट में आठ लोगों की मौत हुई। अग्निकांड के बाद पुलिस ने फिरोज, याकूब और कय्यूम को मुख्य आरोपी बनाया था। शुक्रवार को जावेद नगर स्थित मकान नंबर 28 और 277 में संचालित अवैध पटाखा फैक्ट्रियों पर कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में बारूद, तैयार पटाखे और निर्माण उपकरण बरामद किए गए। इस मामले में कय्यूम, याकूब, फिरोज, फ्यूम, आदिल सहित अन्य के खिलाफ नया मुकदमा दर्ज किया गया है।

आईटीआई के पीछे दो फैक्ट्रियां चलाता था वसीम

जांच में सामने आया है कि वसीम खोह नागोरियान क्षेत्र में आईटीआई के पीछे संचालित दो अवैध पटाखा फैक्ट्रियों का संचालन कर रहा था। पुलिस को यहां से हजारों किलो बारूद और पटाखा निर्माण सामग्री मिली है। जांच एजेंसियां उसके नेटवर्क और सहयोगियों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।

दाऊद नगर फैक्ट्री का संचालक निकला अकील

पुलिस जांच में दाऊद नगर क्षेत्र में संचालित एक अन्य अवैध पटाखा फैक्ट्री का संचालन अकील द्वारा किए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस टीम उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

नाबालिगों और महिलाओं से कराया जाता था काम

जांच में यह भी सामने आया है कि दिल्ली निवासी आलम खान फैक्ट्री में मैनेजर के रूप में काम करता था। वह आसिफ कुरैशी के साथ मिलकर पटाखा निर्माण का संचालन करता था। आरोप है कि ये लोग 15 से 16 वर्ष के नाबालिग बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को मामूली मजदूरी का लालच देकर बेहद जोखिम भरे काम में लगाते थे।

घर-घर में कराया जाता था पैकिंग का काम

सूत्रों के अनुसार खोह नागोरियान क्षेत्र में संचालित विभिन्न अवैध फैक्ट्रियों में 150 से अधिक लोग कार्यरत थे। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, नाबालिग और बुजुर्ग शामिल थे। इतना ही नहीं, पटाखों की लेबलिंग और बॉक्स पैकिंग का काम आसपास के कई घरों में भी कराया जाता था। चंद पैसों की मजदूरी के लालच में अनेक परिवार इस अवैध कारोबार से जुड़ गए थे, जिससे पूरे इलाके में पटाखा निर्माण का समानांतर नेटवर्क खड़ा हो गया था।

गिरफ्तारी की मांग तेज

घटना के बाद पुलिस और प्रशासन पूरे नेटवर्क की जांच में जुटे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाती तो आठ लोगों की जान बचाई जा सकती थी। अब क्षेत्रवासी सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।