यूपी के लोगों को बिजली बिल में अतिरिक्त शुल्क से जल्द मिल सकती है मुक्ति

लखनऊ: भीषण गर्मी के मौसम में जब बिजली की जरूरत बढ़ने से इसकी खपत बढ़ गई है, यूपी के विद्युत उपभोक्ताओं पर बिल में अतिरिक्त वसूली का बोझ भी बढ़ा दिया गया है। यूपी में दो-तीन दिन में मानसून के दस्तक देने की आशा है, जो गर्मी से राहत देगा। इसके साथ ही लोगों को बिजली बिल में भी राहत मिलने की खबर भी मिल सकती है। एक-दो दिन में उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को बिल में 10 फीसदी अतिरिक्त वसूली से मुक्ति मिल सकती है। जून के बिजली बिल में 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि की वसूली के मामले में शुक्रवार को पावर कॉर्पोरेशन ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) में अपना जवाब दाखिल कर दिया। आशा की जा रही है कि आयोग अतिरिक्त वसूली पर रोक लगा देगा।

पावर कॉर्पोरेशन ने की अन्य राज्यों से तुलना
आयोग की ओर से पावर कॉर्पोरेशन का जवाब दिए जाने के तुरंत बाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी बिजली बिल में अतिरिक्त वसूली पर रोक लगाने का प्रस्ताव दाखिल कर दिया। पावर कॉर्पोरेशन को शुक्रवार, 19 जून तक जवाब दाखिल करने का समय दिया गया था। पावर कॉर्पोरेशन अपने जवाब में तर्क दिया है कि दिल्ली सहित कई अन्य प्रदेशों में ईंधन अधिभार शुल्क की गणना इसी तरह से की जाती है, इसलिए उत्तर प्रदेश में अपनाई गई प्रोसेस को उचित माना जाना चाहिए।

कॉर्पोरेशन के तर्क से उपभोक्ता परिषद असहमत
इस पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि अन्य राज्यों की प्रक्रिया का उत्तर प्रदेश से कोई संबंध नहीं है। यूपी के लिए यहां के नियामक की व्यवस्था के अनुसार फैसला लिया जाएगा। परिषद ने आयोग से अतिरिक्त वसूली पर तुंरत रोक लगाने की मांग की है। उसने वसूली गई रकम का समायोजन करने की भी मांग की है। पावर कॉर्पोरेशन ने आयोग में दाखिल जवाब में कहा है कि आयोग इस मामले में जो भी फैसला देगा वह उसे मंजूर होगा।

आयोग ने ईंधन अधिभार वसूलने को नियम विरुद्ध माना
पावर कॉर्पोरेशन का जवाब आने के बाद नियामक आयोग एक-दो दिन में फैसला दे सकता है। चूंकि आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि बकाया को ईंधन अधिभार शुल्क में वसूलना नियम विरुद्ध है, इसलिए वह इसी आधार पर निर्णय ले सकता है। आशा है कि यूपी के बिजली उपभोक्ताओं को एक-दो दिन में राहत देने वाली खबर मिल सकती है।

आयोग ने अतिरिक्त शुल्क वसूलने की नहीं दी इजाजत
इससे पहले उत्तर प्रदेश में बिजली बिलों पर 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार (FPPAS) लगाने के उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने रोक लगा दी थी। आयोग ने कॉर्पोरेशन को जून के बिजली बिलों में यह अतिरिक्त शुल्क जोड़ने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। इसके साथ आयोग ने इस मामले में कॉर्पोरेशन से जवाब मांगा था। कॉर्पोरेशन को 19 जून तक जवाब देना था।

आयोग ने पॉवर कॉर्पोरेशन को नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे थे। हालांकि सप्ताह भर बाद भी कॉर्पोरेशन जवाब नहीं दे पाया था। इसके प्रबंध निदेशक ने जवाब देने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था। इसके बाद नियामक आयोग ने प्रबंध निदेशक को फिर से नोटिस भेजा था।

अधिभार पर आयोग देगा अंतिम फैसला
पावर कॉर्पोरेशन ने बिजली की खरीद और उत्पादन लागत में वृद्धि का हवाला देते हुए बिलों में 10 फीसदी ईंधन अधिभार जोड़ने का आदेश दिया था। इस पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस अधिभार को नियमों के विरुद्ध बताया था और नियामक आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई थी। इस मामले में आयोग ने जून के बिजली बिलों में इस अधिभार की वसूली पर रोक लगा दी थी। पावर कॉर्पोरेशन ने आयोग के नोटिस पर विस्तृत जवाब दे दिया है। अब नियामक आयोग को इस पर अंतिम फैसला देना है।