‘भ्रष्टाचार समाज के ताने-बाने को पहुंचा रहा नुकसान’, हिमाचल हाई कोर्ट ने पंचायत सचिव की सजा को सही ठहराया

शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार के दोषी पंचायत सचिव को सुनाई एक साल की कैद की सजा को पर्याप्त ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार समाज के ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रहा है, इसलिए दोषी की सजा सही है। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने प्रार्थी बलराम कुमार की अपील को खारिज कर कहा कि अभियोजन पक्ष दंडनीय अपराधों के लिए मामले को बिना किसी उचित संदेह के साबित करने में सफल रहा।

जन्म प्रमाणपत्र के लिए मांगे थे 3000 रुपये
पुलिस ने आरोपित के खिलाफ ट्रायल कोर्ट विशेष न्यायाधीश ऊना के सामने चालान पेश किया था। शिकायतकर्ता जगदेव चंद बेटे श्याम सुंदर के सेना में एडमिशन और पासपोर्ट बनवाने के लिए उसका जन्म प्रमाणपत्र बनवाना चाहते थे। वह पंचायत सचिव बलराम से दो से तीन बार मिले। वह टालमटोल करता रहा और बाद में 3,000 रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने इतनी रकम देने में असमर्थता जताई तो ₹2,500 रुपये की मांग की।

2010 का मामला
शिकायतकर्ता और गवाह चार अक्टूबर 2010 की सुबह आरोपित के घर गए। शिकायतकर्ता ने बेटे का जन्मप्रमाण पत्र मांगा और आरोपित ने शिकायतकर्ता से ₹2,500 रुपये देने को कहा। शिकायतकर्ता ने कहा वह पैसे नहीं लाया है और दिन के समय दे देगा। आरोपित ने शिकायतकर्ता से ₹2,000 रुपये लेकर हरोली ब्लॉक आने को कहा। शिकायतकर्ता ने पुलिस के पास आवेदन दायर किया और पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की।

12 गवाहों से पूछताछ के बाद कोर्ट ने सुनाया था फैसला
अभियोजन पक्ष ने मामला साबित करने के लिए 12 गवाहों से पूछताछ की। ट्रायल कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं। इस बात की पुष्टि रंगे हाथ पकड़ने से हुई। ट्रायल कोर्ट ने आरोपित के दोष सिद्ध होने पर एक साल की कठोर कैद की सजा सुनाई थी।