SBI Report on EV: देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की बढ़ती डिमांड से पेट्रोल-डीजल का यूज कम हो रहा है. इससे देश में क्रूड ऑयल भी कम आयात हो रहा है और इम्पोर्ट बिल में भारी कटौती हुई है. एसबीआई (SBI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि 2030 तक देश के व्हीकल मार्केट में इलेक्ट्रिक व्हीकल की हिस्सेदारी 20 फीसदी भी हो जाती है तो भारत के तेल आयात में करीब 1 लाख करोड़ की भारी-भरकम बचत हो सकती है. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया कि साल 2027 से 2030 के बीच करीब 35 लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल पेट्रोल से चलने वाली कार की जगह ले लेंगे. इससे पर्यावरण के साथ ही देश की इकोनॉमी को भी बड़ा फायदा होगा.
एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत में मिडिल ईस्ट (वेस्ट एशिया) में पैदा हुए तनाव और संघर्ष के बाद से भारत में ईवी अपनाने की रफ्तार में जबरदस्त तेजी आई है. इस ग्लोबल संकट के समय भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक यात्री कारों, टू-व्हीलर्स और थ्री-व्हीलर्स के रजिस्ट्रेशन में अचानक बड़ा उछाल देखा गया. इससे यह साफ है कि इंडियन कस्टमर का भरोसा ईवी की तरफ बढ़ रहा है. मार्च से जून 2026 के बीच हर महीने औसतन 2.3 लाख ईवी का रजिस्ट्रेशन हुआ, जबकि साल 2025 में यह आंकड़ा महज 1.3 लाख प्रति माह था. यानी हर महीने औसतन एक लाख से ज्यादा कारें भारतीय सड़कों पर बढ़ी हैं.
25 लाख के पार रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा पहुंचने की उम्मीद
एसबीआई की तरफ से अनुमान जताया गया कि 2026 के अंत तक देश में ईवी के रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 25 लाख पार कर जाएगा. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेताया गया कि बढ़ती डिमांड के साथ देश में चार्जिंग स्टेशन का नेटवर्क भी उसी रफ्तार से बढ़ाना होगा. देश के कुल चार्जिंग नेटवर्क में फास्ट चार्जर्स की हिस्सेदारी महज 30 फीसदी के करीब है, जिसे बढ़ाना बेहद जरूरी है. एसबीआई ने सरकार से अगले 10-15 साल लंबा रोडमैप बनाने की सिफारिश की है.
साउथ के राज्यों का इकोसिस्टम काफी मजबूत
ईवी के इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए रिपोर्ट में कुछ सुझाव भी दिये गए. साथ ही रिपोर्ट में राज्यों के बीच चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की असमानता को लेकर भी चिंता जताई गई. मौजूदा समय में भारत में कुल 29,151 चार्जिंग स्टेशन हैं, जिनमें से अकेले कर्नाटक और महाराष्ट्र के पास देश का 35 फीसदी बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है. कुछ राज्यों में एक चार्जिंग स्टेशन पर 200 से ज्यादा कारें निर्भर हैं, जबकि कुछ राज्यों में यह संख्या प्रति स्टेशन 50 के करीब है. तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और गोवा में फास्ट-चार्जिंग नेटवर्क काफी मजबूत है.
32,000 नए चार्जिंग प्वाइंट लगेंगे
इस बदलाव के बीच राजधानी दिल्ली पीछे नहीं है. दिल्ली सरकार ने अपनी नई ईवी पॉलिसी के तहत अगले चार साल में शहर के अंदर 32,000 नए चार्जिंग प्वाइंट लगाने का बड़ा टारगेट हासिल किया है. एसबीआई की रिपोर्ट से यह सामने आया कि देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल का भविष्य और इसकी लंबी अवधि की सफलता पूरी तरह से इस पर निर्भर करेगी कि हम देशभर में कितनी जल्दी और कितनी आसानी से पर्याप्त चार्जिंग सुविधाएं उपलब्ध करा पाते हैं.