राजस्थान के हाड़ौती इलाके में मॉनसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जुलाई आधे से ज्यादा गुजरने के बाद भी बारिश का इंतजार खत्म नहीं हुआ है. हालात ये हैं कि कोटा संभाग में खरीफ की बुवाई के लिए बड़ा हिस्सा खाली पड़ा है. सोयाबीन और धान जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई का समय निकला जा रहा है.
मॉनसून की बेरुखी का असर अब राजस्थान के बांधों पर भी साफ नजर आ रहा है. चंबल नदी पर बने बांधों में पिछले साल इन दिनों पानी की जमकर आवक होती थी, लेकिन अब हालात ऐसे हो रहे हैं कि जल संसाधन विभाग बांधों में पानी के आने का इंतजार कर रहा है.
बांधों में पानी की कमी
बारिश की कमी का असर हाड़ौती के बांधों पर भी दिखाई दे रहा है. ईआरसीपी के सबसे बड़े बांध नौनेरा में अभी पानी की स्थिति चिंताजनक है. बांध की भराव क्षमता 52 फीट है, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 0.65 फीट पानी ही मौजूद है. कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणा प्रताप सागर बांधों में भी पिछले साल की तुलना में जलस्तर कम है.
एमपी से पानी की पूर्ति हो रही
जवाहर सागर बांध में करीब 72.99% और राणा प्रताप सागर में 66.86% पानी उपलब्ध है. आलनिया बांध में 33 फीट की क्षमता के मुकाबले करीब 15 फीट और सावन भादो बांध में 42 फीट के मुकाबले 11.80 फीट पानी बचा है. सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता सुनील गुप्ता मुताबिक, मॉनसून कमजोर रहने का असर बांधों में पानी की आवक पर पड़ा है. फिलहाल सिंचाई के लिए मध्य प्रदेश से पानी की पूर्ति की जा रही है.