कानपुरः उत्तर प्रदेश के कानपुर के सर्किट हाउस में गुरुवार को उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती अनीता गुप्ता की जनसुनवाई में महिलाओं की लंबी कतार लगी थी..कोई घरेलू हिंसा से परेशान थी, तो कोई पति की बेरुखी से. लेकिन एक 26 साल की महिला की कहानी ने वहां मौजूद सभी लोगों को चौंका दिया. रोते हुए महिला ने बताया कि उसका पति गे (समलैंगिक) है और अपने एक दोस्त के साथ वैवाहिक रिश्ते जैसे संबंध रखता है. विरोध करने पर पति और ससुराल वाले मिलकर उसकी पिटाई करते हैं. उसने बताया कि उसकी शादी अप्रैल 2021 में दिल्ली में हुई थी और उसका एक बेटा भी है. शादी के बाद पति ने उससे दूरी बना ली. कुछ समय के लिए जबरन रिश्ता निभाने के बाद फिर वही व्यवहार शुरू हो गया.
‘पति के जेब में कई आपत्तिजनक सामान मिले’
महिला ने कहा कि कई बार पति की जेब में आपत्तिजनक सामान मिला और पूछने पर वह मारपीट करने लगा. अब पति उसे घर नहीं बुला रहा और उसके सारे कागजात भी ससुरालवालों ने रख लिए हैं. महिला की बात सुनकर वहां बैठी कई और महिलाएं भी भावुक हो उठीं. महिला आयोग की सदस्य अनीता गुप्ता ने तुरंत महिला थाना प्रभारी को त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए. वहीं दूसरी महिला ने बताया कि उसका पति कहता है, ‘तुम दुबली हो, बच्चे नहीं हो रहे.’
‘पति कहता है- तुम दुबली हो, बच्चे नहीं हो रहे’
उसी जनसुनवाई में कानपुर घंटाघर क्षेत्र की एक अन्य विवाहिता ने बताया कि जालौन में 2022 में उसकी शादी हुई थी. पति और ससुरालवाले अब उसे इसलिए परेशान कर रहे हैं क्योंकि वह दुबली है और बच्चे नहीं हो रहे. पति अब साथ नहीं रखने की बात कहता है और बार-बार तलाक मांगता है. ऐसी शिकायतें सुनकर आयोग सदस्य ने अधिकारियों से कहा कि महिलाओं के मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता से कार्रवाई करें, ताकि किसी पीड़िता को न्याय पाने में देर न हो.21 मामलों पर हुई सुनवाई, दिए सख्त निर्देश.
जेल का खाना खाया और लड़कियों से की बात
इस जनसुनवाई में कुल 21 मामले सामने आए, जिनमें घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद, संपत्ति झगड़े और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसी शिकायतें शामिल रहीं. अनीता गुप्ता ने हर केस को ध्यान से सुना और संबंधित अधिकारियों को तुरंत जांच और रिपोर्ट देने को कहा. निरीक्षण में बालिकाओं से बातचीत की और जेल का खाना भी खाया. जनसुनवाई के बाद अनीता गुप्ता ने ख्योरा स्थित बाल संरक्षण गृह (बालिका) का निरीक्षण किया. उन्होंने बालिकाओं से बातचीत की और कहा कि वे अपने जीवन में आत्मनिर्भर बनें. उन्होंने संस्थान की स्वच्छता, भोजन और शिक्षा की व्यवस्थाओं पर संतोष जताया, लेकिन कुछ सुधार के सुझाव भी दिए.