Budget Expectation : अगला बजट पेश होने में अब बस 3 महीने का समय बचा है. सरकार ने भी इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं और उद्योग जगत भी अपने-अपने हिसाब से बजट को लेकर सलाह-मशविरा करना शुरू कर चुका है. इस बीच उद्योग संगठन पीएचडी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स (PHDCCI) ने सरकार से गुहार लगाई है कि आम आदमी को इनकम टैक्स में और राहत दी जानी चाहिए. उद्योग संगठन ने कहा है कि सालाना 50 लाख रुपये तक कमाई करने वाले व्यक्तिगत करदाताओं को टैक्स की दरों में राहत दी जानी चाहिए.
सरकार ने अगर उद्योग संगठन की बातों पर गौर किया तो सालाना 50 लाख रुपये तक की कमाई टैक्स फ्री हो सकती है. उद्योग संगठन ने अपील की है कि नए टैक्स रिजीम के तहत लगने वाले 30 फीसदी दर को बढ़ाकर 50 लाख से ऊपर की कमाई पर लागू किया जाए. अभी नए रिजीम में सालाना 24 लाख रुपये से ज्यादा कमाई वाले करदाता पर 30 फीसदी का स्लैब लगाया जाता है. उद्योग संगठन ने अपनी सिफारिश राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव को सौंप दी है. साथ ही अप्रत्यक्ष कर में भी कुछ बदलाव करने का सुझाव दिया है.
कॉरपोरेट टैक्स घटाने की मांग
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण अगले साल 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी. इससे पहले PHDCCI ने व्यक्तिगत करदाताओं के साथ कॉरपारेट टैक्स को भी 25 फीसदी से नीचे लाने की सिफारिश की है. उद्योग संगठन ने कहा कि पहले कॉरपोरेट टैक्स 35 फीसदी था, जो अब 25 फीसदी हो गया है. इससे टैक्स कलेक्शन भी 2018-19 के 6.63 लाख करोड़ से बढ़कर 8.87 लाख करोड़ रुपये हो गया है. यह काफी बड़ा ग्रोथ है और अगर इसमें और कमी की जाए तो कंपनियां टैक्स जमा करने के लिए और प्रोत्साहित हो सकती हैं.
39 फीसदी तक हो जाता है टैक्स
उद्योग संगठन ने कहा कि अभी पर्सनल टैक्स में सबसे ज्यादा रेट 30 फीसदी है, जिस पर 5 से 25 फीसदी तक सरचार्ज लगता है. इस तरह कुछ मामलों में टैक्स की दर 39 फीसदी तक पहुंच जाती है. यह काफी दबाव वाली बात है कि एक व्यक्ति की 40 फीसदी कमाई सरकार को जाती है, जबकि 60 फीसदी उसके खर्च के लिए बचती है. संगठन ने कहा कि 30 लाख तक कमाई पर अधिकतम टैक्स 20 फीसदी ही होना चाहिए और 30 से 50 लाख तक कमाई पर यह 25 फीसदी से ऊपर नहीं जाना चाहिए. सालाना कमाई जब 50 लाख से ऊपर जाए तभी 30 फीसदी का टैक्स लगना चाहिए.
नई कंपनियों पर कम हो टैक्स
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा है कि देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए इनकम टैक्स की धारा 115BAB में बदलाव करना चाहिए और नई इकाइयों को टैक्स में राहत देना चाहिए. इन पर शुरुआती इनकम टैक्स 15 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए. इस पर सरचार्ज लगाया जा सकता है. सरकार ने यह टैक्स रेट सितंबर, 2019 में लागू किया था, जिसे बढ़ाकर 31 मार्च, 2024 तक कर दिया था. लेकिन, इस टैक्स रेट को आगे भी लागू रखना चाहिए. इससे विदेशी कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए काफी प्रोत्साहन मिलेगा.