भारत की सड़कें अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और हाईटेक होने जा रही हैं. देश में बढ़ते सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों को रोकने के लिए सरकार ने एक बेहद क्रांतिकारी कदम उठाया है. भारत सरकार ने कारों में इस्तेमाल होने वाले एडवांस्ड रडार सेंसर के लिए लाइसेंस की जरूरत को पूरी तरह से खत्म कर दिया है. इस एक फैसले से भारत में न सिर्फ गाड़ियों की सेफ्टी कई गुना बढ़ जाएगी, बल्कि बिना ड्राइवर के चलने वाली यानी सेल्फ-ड्राइविंग कारों का सपना भी सच होने के बेहद करीब आ गया है.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल मार्केट है, लेकिन यहां की सड़कों को सबसे खतरनाक माना जाता है. आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में भारत में करीब 5 लाख सड़क हादसे हुए, जिनमें 1,77,000 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई. सरकार लंबे समय से इन मौतों को कम करने का उपाय तलाश रही थी. इसी कड़ी में गुरुवार को सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर 77GHz से 81 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड वाले रडार सेंसर के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है. अब कंपनियों को इन एयरवेव्स का इस्तेमाल करने के लिए सरकार से अलग से मंजूरी नहीं लेनी होगी.
कैसे काम करती है यह जादुई रडार तकनीक
यह रडार सेंसर गाड़ियों के लिए एक तीसरी आंख की तरह काम करता है. इसकी मदद से कारें अपने आसपास मौजूद दूसरी गाड़ियों, इंसानों या चीजों को आसानी से पहचान सकती हैं. यह सेंसर गाड़ी को आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाए रखने में मदद करता है. इसी तकनीक के दम पर कारों में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (यानी खतरा देखकर खुद ब्रेक लगना), एडेप्टिव क्रूज कंट्रोल और ब्लाइंड-स्पॉट वार्निंग जैसे शानदार फीचर्स मिलते हैं. यही एडवांस फीचर्स आगे चलकर पूरी तरह से ऑटोनॉमस या सेल्फ-ड्राइविंग कारों का आधार बनते हैं.
टाटा, मारुति और महिंद्रा को होगा बड़ा फायदा
सरकार के इस फैसले से भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक नई क्रांति आने वाली है. मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी दिग्गज भारतीय कार कंपनियों को इससे सीधा फायदा होगा. इसके साथ ही गाड़ियों के कलपुर्जे बनाने वाली जर्मनी की बॉश (Bosch) और कॉन्टिनेंटल (Continental) जैसी बड़ी सप्लायर कंपनियां भी अब तेजी से भारतीय बाजार के लिए हाईटेक सेफ्टी टूल्स बना सकेंगी. इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में भारत की सस्ती और बजट कारों में भी आपको दुनिया के सबसे बेहतरीन सेफ्टी फीचर्स देखने को मिलेंगे.
ग्लोबल स्टैंडर्ड के बराबर आया भारत
लाइसेंस हटाने के इस फैसले के बाद अब भारत भी अमेरिका, यूरोपीय संघ और वैश्विक दूरसंचार मानकों की लीग में शामिल हो गया है. ये सभी देश गाड़ियों के रडार के लिए इसी सेम फ्रीक्वेंसी बैंड का इस्तेमाल करते हैं. इस नियम के आने से अब विदेशी और देसी कार निर्माताओं को भारत के लिए अलग से कोई खास हार्डवेयर या वर्जन तैयार नहीं करना पड़ेगा. वे दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले रेडीमेड रडार सिस्टम को सीधे भारतीय कारों में फिट कर सकेंगे. इससे न सिर्फ कारों को बनाने की लागत कम होगी, बल्कि भारतीय सड़कों पर चलने वाली गाड़ियां भी इंटरनेशनल लेवल की सुरक्षित बन जाएंगी.