नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल की चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार को केंद्रीय सचिवों संग अहम बैठक की। इस मीटिंग में सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिव शामिल हुए। कैबिनेट सचिव के अलावा, इस बैठक में प्रधानमंत्री के दो प्रधान सचिव, पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास एवं सभी प्रमुख विभागों के सचिव भी शामिल हुए। बैठक में सुधार एजेंडे पर व्यापक चर्चा पर ध्यान केंद्रित किया गया, क्योंकि सरकार अगली पीढ़ी के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रही है।
पीएम मोदी और केंद्रीय सचिवों के बीच हुई इस चार घंटे की बैठक में कई प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई। मुख्य रूप से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, डिजिटल गवर्नेंस, नियमों में ढील और ‘लास्ट-माइल डिलीवरी’ (सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने) जैसे विषयों पर फोकस किया गया।
बैठक में क्या बात हुई?
बैठक के दौरान सचिवों ने अपने-अपने मंत्रालयों और विभागों द्वारा इन दोनों क्षेत्रों में उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के विजन को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए किए जा रहे प्रयासों, विभिन्न क्षेत्रों की चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर भी जानकारी दी। साथ ही शासन और सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा की गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार के सभी विभागों को ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण अपनाते हुए आपसी तालमेल के साथ काम करना चाहिए और विभागीय सीमाओं (साइलो) को खत्म करना चाहिए। उन्होंने एकीकृत योजना और बेहतर समन्वय के लिए पीएम गतिशक्ति प्लेटफॉर्म के व्यापक उपयोग पर जोर दिया। ताकि विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय बढ़े और निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो।
प्रधानमंत्री ने सचिवों से यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन केवल उनके क्रियान्वयन से नहीं किया जाना चाहिए। बल्कि आम लोगों के जीवन पर पड़ने वाले ठोस और सकारात्मक प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए।
मौजूदा वित्त वर्ष में सचिव स्तर की पहली बैठक
मौजूदा वित्त वर्ष में प्रधानमंत्री के साथ सचिव-स्तर की यह पहली बड़ी बैठकों में से एक है। इसे 2026 की दूसरी छमाही के लिए सरकार की मुख्य नीतिगत प्राथमिकताओं के साथ नौकरशाही को एक सीध में लाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
यह समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार ने हाल ही में रेलवे सहित कई मंत्रालयों में ’52 सप्ताह में 52 सुधार’ जैसी महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है, जिसमें इन्हें लागू करने की समय-सीमा स्पष्ट रूप से तय की गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा तय समय-सीमा के भीतर परिणाम हासिल करने के महत्व पर जोर दिया है, जिससे समय-समय पर समीक्षा सरकार के कामकाज का एक अहम हिस्सा बन गई है।