Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह इस युद्ध को जीत चुके हैं क्योंकि ईरान की नौसेना एवं वायु सेना पूरी तरह से खत्म की जा चुकी है। होमलैंड सेक्युरिटी सचिव के शपथ ग्रहण समारोह में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ‘इस वक्त ईरान के साथ हमारी बातचीत हो रही है। मैं आपको बता सकता हूं कि वे एक डील करना चाहेंगे। ईरान की जगह कोई और होता तो भी वह वही करता। उनकी नौसेना खत्म हो गई है, उनकी वायु सेना अब नहीं है। संचार के उनके सभी साधन खत्म हो गए हैं। उनके पास जो कुछ भी था वह सभी खत्म हो गया है।’
हम इस युद्ध को जीत चुके हैं-ट्रंप
ईरान के साथ शांति वार्ता को लेकर उन्हें कितनी उम्मीद है, इस सवाल पर ट्रंप ने कहा कि ‘ मैं यह निश्चित रूप से आपको नहीं बता सकता लेकिन हम इसे खत्म करने जा रहे हैं। हम इस युद्ध को जीत चुके हैं। हमारे फाइटर प्लेन तेहरान एवं ईरान के अन्य शहरों के ऊपर से उड़ सकते हैं। ईरान इन्हें रोकने के लिए कुछ नहीं कर सकता। यदि हम किसी बिजली संयंत्र को निशाना बनाना चाहें तो वे कुछ नहीं कर सकते। वे पूरी तरह से हार चुके हैं। सैन्य रूप से वे मृत हो चुके हैं।’ ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान आगे कोई न्यूक्लियर हथियार नहीं रखेगा।
‘युद्ध शुरू करने के लिए हेगसेथ ने दी थी सलाह’
इससे पहले सोमवार को उन्होंने कहा था कि कि उनके रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ही वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सैन्य कार्रवाई के लिए जोर दिया था। ट्रंप ने अपने बगल में बैठे हेगसेथ से कहा, ‘पीट, मुझे लगता है कि आप ही वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने इस बारे में बात की थी, और आपने कहा था, ‘चलो ऐसा करते हैं, क्योंकि आप उन्हें परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते।’
हवाई हमलों ने राजधानी तेहरान में भारी तबाही मचाई
इस बीच ईरान पर मंगलवार को किए गए हवाई हमलों ने राजधानी तेहरान में भारी तबाही मचाई, लेकिन ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने भी इजराइल के तेल अवीव और पश्चिम एशिया के कई ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका युद्ध समाप्त करने के लिए इस्लामिक गणराज्य के साथ बातचीत कर रहा है। हजारों और अमेरिकी मरीन सैनिकों के खाड़ी क्षेत्र की ओर रवाना होने, दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर तीव्र हमला जारी रहने और ईरान द्वारा किसी भी प्रकार की बातचीत से इनकार करने के बीच युद्ध तेज होता दिखा।
ईरान को दी गई समयसीमा आगे बढ़ा दी
हालांकि, इसके एक दिन पहले ट्रंप ने ईरान को दी गई वह समयसीमा भी आगे बढ़ा दी, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए नहीं खोलने पर ईरान के ऊर्जा संयंत्रों को हवाई हमलों में निशाना बनाने की चेतावनी दी गई थी। इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर तेहरान के नियंत्रण ने वैश्विक स्तर पर माल के परिवहन को बाधित कर दिया है, ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और विश्व अर्थव्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। पाकिस्तान ने राजनयिक वार्ता की मेजबानी की पेशकश की, लेकिन ईरान अपने रुख पर अड़ा रहा और ‘पूर्ण विजय प्राप्त होने तक’ लड़ने की कसम खाई। अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी वार्ता (जिसका मंगलवार को होना बेहद अनिश्चित दिखा) को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।