58 लाशें, कटी गर्दन, फटा माथा…याद है बिहार का लक्ष्मणपुर-बाथे नरसंहार?

अरवल: बिहार चुनाव प्रचार 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत एनडीए के तमाम बड़े नेता आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सरकारों के जंगलराज की याद दिला रहे हैं. पीएम याद करा रहे हैं कि लालू-राबड़ी की सरकारों में बिहार ने एक से बढ़कर एक नरसंहार की नृशंस घटनाएं देखी हैं.
दोनों बड़े नेता तमाम रैलियों में अपील कर रहे हैं कि वोटिंग में एक गलती बिहार को 20 साल पीछे लेकर चला जाएगा. एनडीए नेताओं के भाषणों में कहा जा रहा है कि नई पहचान के साथ जंगलराज वाले एक बार फिर से सत्ता में आना चाहते हैं, इसलिए वे बिहार के वोटरों को सतर्क कर रहे हैं. ऐसे में हम आपको लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सरकारों में हुए बड़े नरसंहारों की याद करा रहे हैं. सीरीज की पहली स्टोरी में हम आपको लक्ष्मणपुर-बाथे नरसंहार के बारे में बता रहे हैं.

लक्ष्मणपुर-बाथे नरसंहार बिहार के सबसे बड़ा और नृशंस माना जाता है. इस नरसंहार का दंश झेल चुके परिवारों के लोग आज भी उस पल को याद कर सिहर जाते हैं. इसमें बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक को निशाना बनाया गया था. 30 नवंबर और 1 दिसंबर, 1997 की रात अरवल जिले के लक्ष्मणपुर-बाथे गांव में नरसंहार को अंजाम दिया गया था. रणवीर सेना ने 58 लोगों की नृशंस तरीके से हत्या कर दी थी.

लक्ष्मणपुर-बाथे नरसंहार में कई परिवारों को अनाथ कर दिया था. कई परिवारों में तो घर संभालने के लिए एक महिला तक नहीं बची थी. कुछ परिवारों में तो सिर्फ बच्चे ही जीवित बचे थे. इस नरसंहार में तीन साल के बच्चे से लेकर 65 साल के बुज़ुर्ग तक की हत्या की गई थी.

इस नरसंहार के बाद पता चला था कि लक्ष्मणपुर बाथे के रहने वाले विमलेश राजवंशी को छोड़कर उनकी फैमिली में सभी की हत्या कर दी गई थी. हत्यारों ने सभी पांच लोगों को मौत के घाट उतार दिया था. मरने वालों में उनके पिता, दो भाई और दोनों भाभियां शामिल रहीं.

इसी तरह दुखिया देवी नाम की महिला के पति और दो बेटों की भी हत्या कर दी गई थी. सहनी यानी मछुआरा जाति से आने वाला यह परिवार सोन नदी में मछली मारने के बाद लौट रहे थे तभी रास्ते में ही उनकी हत्या कर दी गई थी. इस परिवार का गला रेत दिया गया था. इसी तरह लक्ष्मणपुर बाथे में कई और परिवार रहे जिनका सबकुछ उजड़ गया.

लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार का दोषी कौन?
आरोप है कि भूमिहार जाति के लोगों की रणवीर सेना ने लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार को अंजाम दिया था. पटना की एक विशेष अदालत ने 7 अप्रैल, 2010 को 16 दोषियों को फांसी और 10 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी. पटना हाई कोर्ट में जब यह मामला पहुंचा और इसपर फैसला आया तो हर कोई हैरान रह गया. सबूतों के अभाव में पटना हाइकोर्ट ने नौ अक्टूबर 2013 के फैसले में सभी दोषियों को बरी कर दिया था. इसके बाद यह आज तक सवाल बना हुआ है कि आखिर लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार को किसने अंजाम दिया.