बिहार में ‘परफॉर्मेंस गेम’, सियासी पिच पर CM की कुर्सी के लिए सम्राट और विजय सिन्हा की अक्रामक बैटिंग!

Bihar Politics: बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद अब अंदर ही अंदर एक और लड़ाई शुरू हो गई है। बीजेपी में भावी मुख्यमंत्री बनने की वो लड़ाई, जिसका मुद्दा अभी तक बाहर नहीं आया है। लेकिन परफॉर्मेंस गेम के आधार पर दोनों डिप्टी सीएम ये दिखाना चाहते हैं कि आगामी दिनों में और भविष्य में मुख्यमंत्री का चेहरा, उनसे बेहतर कोई नहीं हो सकता। इसे लेकर जेडीयू असहज है, इसकी चर्चा हो रही है।

बिहार का अगला सीएम कौन
पटना: एनडीए की राजनीति में सब कुछ पटरी पर नहीं चल रहा है। कई मामलों में जेडीयू और बीजेपी आमने- सामने हैं। हालांकि, ऐसा कहना अर्धसत्य हो सकता है। दरअसल, सत्ता की राजनीति में इन दिनों बिहार में ‘परफॉर्मेंस गेम’ चल रहा है। खास कर दोनों ही उप मुख्यमंत्री यानी गृहमंत्री सम्राट चौधरी और उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा। दोनों ही परफॉर्मेंस गेम भावी मुख्यमंत्री के रूप में खेल रहे हैं। इसलिए जदयू के नेता या उनके समर्थक को उनका इस तरह की आक्रामक बैटिंग पसंद नहीं आ रही है। हाल ही में जदयू के उपाध्यक्ष गौरव राणा के बयान को इसी अंदाज में देखा जाना चाहिए।

क्या कहा गौरव राणा ने?
बेगूसराय में निगम पार्षद और जदयू नेता गौरव राणा ने कहा कि ‘जब से सम्राट चौधरी के हाथ में गृह मंत्रालय आया है, तब से लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, लगातार अपहरण कर लोगों की हत्या की जा रही है। इसलिए सम्राट चौधरी को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। उनके इस बयान पर ही अटकलबाजी का साम्राज्य खड़ा किया जाने लगा कि जदयू और भाजपा में अनबन हो गया। इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया कि आखिर गौरव राणा ने ऐसा क्यों कहा? जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष गौरव राणा ने गृह मंत्री सम्राट चौधरी पर ही बड़ा आरोप मढ़ते कह डाला कि इनसे होम डिपार्टमेंट संभल ही नहीं पा रहा है। इसे बयान को जदयू और भाजपा में अनबन के रूप में देखना बेमानी है।

कौन हैं गौरव राणा
जदयू नेता गौरव राणा बेगूसराय के ही हैं। बेगूसराय में 23 दिसंबर की रात एक मोबाइल दुकानदार को अगवा कर लिया गया। लोहिया नगर थाना क्षेत्र के पन्हास गांव निवासी मोबाइल दुकानदार सुमित कुमार का अपहरण कर कर लिया था। इसके बाद पुलिस ने तफ्तीश करते हुए 26 दिसंबर को कार का पता लगा लिया और उसे चला रहे शख्स को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में ड्राइवर ने बताया कि सुमित का अपहरण करने के बाद उसी रात चेरिया बरियारपुर थाना क्षेत्र के रामपुर पुल पर उसकी हत्या कर शव को गंडक नदी में फेंक दिया गया था। उस दिन से पुलिस लगातार सुमित की शव की तलाश कर रही थी, 30 दिसंबर को पुलिस ने सुमित की लाश बसही गांव के पास गंडक नदी किनारे से ढूंढ निकाली।

स्थानीय लोगों का समर्थन
वहीं दूसरी ओर सियासी जानकारों में चर्चा है कि गौरव राणा एक स्थानीय नेता हैं तो अपने को स्थानीय जनता से जुड़ाव दिखाने के लिए ये बोल रहे है। स्थानीय और पीड़ित लोगों के घाव पर मरहम लगाने के नाम पर गौरव राणा के बोल कड़े से कड़े हुए। बिहार के राजनीतिक गलियारा में जदयू के उपाध्यक्ष गौरव राणा का विरोध स्थानीय पीड़ित जनता के समर्थन में दिया गया बयान माना जा रहा है। यह बयान उनका निजी बयान है न कि पार्टी का बयान। पार्टी का बयान होता तो जदयू के तमाम प्रवक्ता अपने अपने अंदाज में गृह विभाग की असफलता बताते। अब तक हत्या बलात्कार,अपहरण,चोरी डकैती के आंकड़े निकाल कर गृहमंत्री सम्राट चौधरी के बहाने भाजपा पर हमला तेज हो जाते। इस संदर्भ में किसी बड़े नेता के बयान आते। आम तौर पर कार्य पसंद न आने पर सीएम नीतीश कुमार किस विरोध अपने अंदाज में शुरू हो जाता।