पटना: बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अब लोन के लिए एजेंटों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। सरकार की ओर से इन्हें ‘ऑन-डिमांड’ वेतन/पेंशन अग्रिम योजना लागू की है। अब कर्मी अपनी आकस्मिक जरूरतों के लिए वेतन का 30 गुना तक लोन ले सकेंगे, जिसे चुकाने के लिए 5 साल (60 महीने) का समय मिलेगा। ये पूरी प्रक्रिया 100% डिजिटल होगी और ‘शून्य लागत’ मॉडल पर आधारित है, जिससे सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। अल्पकालिक अग्रिम को समय पर लौटाने पर कोई ब्याज नहीं लगेगा। बिहार सरकार इस व्यवस्था में गारंटर की भूमिका निभाएगी, जिससे कर्मियों को बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के तुरंत लोन मिल सकेगा।
बिहार सरकार का बड़ा फैसला
बिहार के वित्त विभाग ने राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों को बड़ी वित्तीय राहत देते हुए एक क्रांतिकारी ‘संकल्प’ जारी किया है। सरकार ने अब बैंकों और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से अल्पकालिक वेतन/पेंशन अग्रिम (Short-term advance) और दीर्घकालिक ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। अक्सर देखा गया है कि आकस्मिक वित्तीय जरूरतों के समय कर्मचारी अनियमित ऋणदाताओं के चंगुल में फंस जाते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए सरकार ने एक पारदर्शी, विनियमित और त्वरित डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने की योजना बनाई है, जो 24×7 उपलब्ध रहेगी।
अब मिलेगी एडवांस सैलरी
इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी ये है कि राज्य सरकार पर इसका कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। यह पूरी तरह से ‘शून्य लागत एवं शून्य दायित्व’ (Zero cost & Zero liability) मॉडल पर काम करेगा। क्रेडिट जोखिम, जैसे कि बकाया राशि की वसूली न हो पाना, पूरी तरह से संबंधित बैंकों की ओर से वहन किया जाएगा। बिहार सरकार इस पूरी प्रक्रिया में केवल एक ‘गारंटर’ की भूमिका निभाएगी, जिससे सरकारी खजाने पर कोई आंच नहीं आएगी।
अग्रिम वेतन और लोन सुविधा की मुख्य शर्तें
कर्मचारियों को 60 दिनों तक के लिए वेतन अग्रिम मिलेगा।
उसी या अगले माह के सैलरी सर्किल में लौटाने पर कोई ब्याज या प्रोसेसिंग शुल्क नहीं देना होगा।
ये सुविधा 2 से 60 महीनों की अवधि के लिए उपलब्ध होगी।
पात्र उपभोक्ता अपने मासिक वेतन या पेंशन का अधिकतम 30 गुना तक लोन ले सकेंगे।
मासिक किस्त की राशि कर्मचारी के शुद्ध वेतन/पेंशन के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, ताकि उनका मासिक खर्च प्रभावित न हो।
100% डिजिटल प्रॉसेस से लोन
ये पूरी व्यवस्था पूरी तरह से पेपरलेस और डिजिटल होगी। वित्त विभाग इस योजना के लिए नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा और टेंडर के माध्यम से योग्य बैंकों का चयन करेगा। लोन की स्वीकृति और ईएमआई की कटौती के लिए तकनीकी एकीकरण किया जाएगा। यह प्रणाली राज्य सरकार के CFMS (कॉम्प्रिहेंसिव फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) और HRMS पोर्टल के साथ एकीकृत होगी, जिससे ईएमआई की कटौती स्वचालित रूप से हो सकेगी।
वित्त विभाग इस योजना के लिए नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा और टेंडर के माध्यम से योग्य बैंकों का चयन करेगा। लोन की स्वीकृति और ईएमआई की कटौती के लिए तकनीकी एकीकरण किया जाएगा।
बिहार सरकार
आरबीआई के नियमों का पालन
नोटिस में सरकार ने साफ किया है कि ये पूरी प्रक्रिया भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों और सूचना प्रौद्योगिकी कानूनों के अनुरूप होगी। चयनित बैंक उपभोक्ताओं को पहले ही सभी शुल्क और शर्तों की जानकारी देंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी। राज्य मंत्रिपरिषद ने 6 मई 2026 को ही इस प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे दी थी। ये सुविधा उन सभी कार्यरत कर्मियों के लिए उपलब्ध होगी जो सेवानिवृत्ति तक सेवा में हैं।