BPSC पेपर लीक में बड़ा खुलासा, बायोमेट्रिक ऑपरेटर ही थे परीक्षार्थी; EOU ने 35 को किया अरेस्ट

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC)ने 20 अप्रैल 2026 को सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) और 23 अप्रैल 2026 को सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी की परीक्षा आयोजित की थी. इन दोनों परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए थे. AEDO की परीक्षा तो राज्य के अधिकांश जिलों में इसके मामले सामने आए. इस पूरे मामले पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीम जांच में जुटी और अब EOU ने इस पर पर बड़ा खुलासा किया है. इस मामले में 35 लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन जो अपराधियों के बैकग्राउंड सामने आए हैं वह हैरान कर देने वाले हैं.

आर्थिक अपराध इकाई के DIG ने दी यह जानकारी
आर्थिक अपराध इकाई के DIG मानवजीत सिंह ढिल्लों ने शुक्रवार (13 जून) की शाम में BPSC की AEDO और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी परीक्षा की पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि इस घोटाले में अपराध का नया तरीका सामने आया है. पहले की परीक्षाओं में ज्यादातर लॉजिस्टिक चेन में गड़बड़ी होती थी.

प्रिंटिंग प्रेस के कर्मी या ट्रांसपोर्ट कंपनियों के स्टाफ परीक्षा माफियाओं से मिलकर पेपर लीक करते थे. सिपाही भर्ती परीक्षा में भी यही पैटर्न देखा गया था, लेकिन AEDO और अपशिष्ट प्रबंधन परीक्षा में नई अपराध शैली से धांधली को अंजाम दिया गया. उन्होंने कहा कि इस बार बायोमेट्रिक कंपनी की संलिप्तता सामने आई है.

बायोमेट्रिक कंपनी की संलिप्तता आई सामने
BPSC ने बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के लिए जयपुर की मेसर्स साई एजुकेट प्राइवेट लिमिटेड से इकरारनामा किया था. जांच में कंपनी के जिला कॉर्डिनेटर और सुपरवाइजर की संलिप्तता भी मिली है. दोनों परीक्षाओं में यही एक बायोमेट्रिक कंपनी थी. इस धांधली को लेकर कुल आठ केस दर्ज हुए हैं.

पहला केस मुंगेर में दर्ज हुआ था. इसके बाद बेगूसराय, नालंदा, नवादा और पटना के श्रीकृष्णपुरी थाने में भी केस दर्ज किए गए. इनमें से पांच केस का अन्वेषण EOU कर रही है. AEDO परीक्षा से जुड़े केस मुंगेर, बेगूसराय, नालंदा और नवादा जिले से संबंधित हैं.

न्यायिक हिरासत में 35 आरोपी
डीआईजी ने कहा कि अब तक कुल 35 लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है. श्रीकृष्णपुरी थाना में दर्ज मामले की जांच भी EOU कर रही है. डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि दोनों परीक्षाओं में बीपीएससी के साथ हुए अनुबंध एवं इकरारनामे की शर्तों में कई उल्लंघन पाए गए हैं.

इसमें सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि कंपनी के कर्मियों को इस परीक्षा में यह घोषित करना था कि स्वयं या उनके निकटतम संबंधी इस परीक्षा में अभ्यर्थी नहीं होंगे, लेकिन अनुसंधान में यह पाया गया कि लगभग जितने भी बायोमेट्रिक कोऑर्डिनेटर या ऑपरेटर पकड़े गए हैं उनमें अधिकांश कर्मी स्वयं AEDO परीक्षा के परीक्षार्थी थे.