पटना. सत्ता के गलियारों में सरकारी आवासों का आवंटन जहां सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है, वहीं बंगले के आकार और उसकी सत्ता प्रतिष्ठानों, जिनमें कद्दावर नेताओं के भी नाम आते हैं, से नजदीकी काफी कुछ राजनीतिक संकेत कर जाता है. बिहार की राजनीति में भी कुछ पते समय के साथ राजनीतिक प्रतीक बन चुके हैं और पटना का 5, देशरत्न मार्ग भी ऐसा ही एक पता है. सत्ता के शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीब स्थित इस बंगले में लंबे समय तक सरकार के सबसे प्रभावशाली नेताओं का निवास रहा है. अब यह निशांत कुमार का ठिकाना बन चुका है और यह बिहार की सियासत में नये संकेत के विमर्श में आ चुका है. निशांत कुमार का यहां आना इसलिए चर्चा का विषय बना क्योंकि वह अभी सक्रिय राजनीति में नए हैं, लेकिन बहुत कम समय में उन्हें सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालय स्वास्थ्य की जिम्मेदारी मिल चुकी है.
निशांत कुमार का नया बंगला और कई राजनीतिक संदेश
दरअसल, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का 5, देशरत्न मार्ग स्थित सरकारी आवास में गृह प्रवेश महज एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा है. यह वही बंगला है, जहां कभी मुख्यमंत्री रहते नीतीश कुमार का राजनीतिक ठिकाना हुआ करता था और बाद के वर्षों में सम्राट चौधरी, तेजस्वी यादव और सुशील कुमार मोदी जैसे प्रभावशाली नेता भी रह चुके हैं. ऐसे में निशांत का इस बंगले में शिफ्ट होना बिहार की राजनीति में उनकी बढ़ती भूमिका और जेडीयू के भीतर उनके बढ़ते महत्व को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है.
53 दिन बाद गृह प्रवेश, लेकिन समय पर सबकी नजर
बता दें कि निशांत कुमार ने मंत्री बनने के 53 दिन बाद अपने नए सरकारी आवास में प्रवेश किया है. गृह प्रवेश के दौरान जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं उपस्थित रहे. इस क्रम में पूजा और सत्यनारायण कथा के बाद निशांत कुमार ने कहा कि वह हमेशा अपने पिता के साथ रहे हैं और आगे भी दोनों आवासों के बीच उनका आना-जाना बना रहेगा. ऐसे में राजनीति के जानकारों की नजर इस बात पर भी है कि यह गृह प्रवेश उस समय हुआ है, जब सम्राट चौधरी पूरी तरह मुख्यमंत्री आवास में शिफ्ट हो चुके हैं और नीतीश कुमार 7, सर्कुलर रोड स्थित नए सरकारी आवास में रह रहे हैं.
निशांत कुमार के गृह प्रवेश के दौरान उनके पिता नीतीश कुमार की वहां व्यक्तिगत उपस्थिति थी. इस अवसर पर निशांत ने स्वयं यह कहा भी कि उन्हें गृह प्रवेश पूजा और सत्यनारायण कथा के दौरान अपने पिता और परिवार के करीबी सदस्यों के साथ रहने में बेहद खुशी हुई. उन्होंने यह भी साफ किया कि वे हमेशा अपने पिता के साथ रहे हैं और अब भी पिता के नए आवास (7 सर्कुलर रोड) और अपने इस सरकारी बंगले के बीच लगातार आते-जाते रहेंगे. ऐसे में राजनीति के जानकार भी यह मानते हैं कि नीतीश कुमार की यह मौजूदगी बताती है कि निशांत कुमार को पूरी तरह से उनका राजनीतिक और पारिवारिक संरक्षण प्राप्त है, जिससे पार्टी के भीतर निशांत के नेतृत्व को लेकर उठने वाले हर संशय और सवाल पर विराम लग गया है.
दरअसल, निशांत कुमार का राजनीतिक सफर भी सामान्य नहीं रहा. अप्रैल में बीजेपी के सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई एनडीएसरकार बनने के समय उनके उपमुख्यमंत्री बनने की चर्चा थी. बाद में उन्होंने सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया. इससे जेडीयू के भीतर भी कई तरह की अटकलें लगीं. लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद परिस्थितियां बदलीं और मई में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के रूप में शपथ ली. अब वह अपने नये बंगले में आ चुके हैं और यहां यह भी बता दें कि यह वही बंगला है जो उनके पिता नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने तक उनका घर था, और सीएम सम्राट चौधरी के सरकारी बंगले के बिल्कुल ही करीब है. ऐसे में यह बदलाव बताता है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका देने का फैसला किया.
क्या JDU भविष्य की तैयारी कर रही है?
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद जेडीयू के भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार चल रही हैं. पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अभी भी नीतीश कुमार के हाथ में है, लेकिन नई पीढ़ी के नेतृत्व को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. ऐसे माहौल में निशांत कुमार की सक्रियता लगातार बढ़ी है. पहले उनका राजनीति में आना, फिर सीधे कैबिनेट मंत्री बनना और अब बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित सरकारी पतों में से एक पर उनका पहुंचना इन चर्चाओं को और बल देता है. हालांकि जेडीयू या सरकार की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है कि संगठन या सरकार में उनकी भूमिका और बढ़ाई जा रही है. लेकिन, राजनीतिक संकेतों और परिस्थितियों के संदर्भ में यह महत्वपूर्ण घटना है.
बिहार की राजनीति में बंगले भी बोलते हैं!
बिहार की राजनीति में सरकारी आवास कई बार राजनीतिक संघर्ष और शक्ति संतुलन का प्रतीक रहे हैं. तेजस्वी यादव और दिवंगत सुशील कुमार मोदी के बीच 5, देशरत्न मार्ग को लेकर हुआ विवाद इसका सबसे चर्चित उदाहरण है. उस समय यह मामला अदालत तक पहुंचा था और लंबे समय तक राजनीतिक बहस का विषय बना रहा. यही कारण है कि जब इसी बंगले में अब निशांत कुमार की एंट्री होती है, तो राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा केवल आवास बदलने तक सीमित नहीं रहती. फिलहाल इतना तय है कि जेडीयू में निशांत कुमार की राजनीतिक मौजूदगी पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे रही है. आने वाले समय में पार्टी संगठन और सरकार में उन्हें कितनी बड़ी भूमिका मिलती है, वही तय करेगा कि यह केवल एक सरकारी आवास का बदलाव था या जेडीयू की नई राजनीतिक दिशा का शुरुआती संकेत.