कौन हैं सैयद अता हसनैन? जिनको मिली बिहार के नए राज्यपाल की कमान

बिहार में सैयद अता हसनैन ने नए राज्यपाल के रूप में शपथ ली है. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन ने ये शपथ दिलाई. शनिवार सुबह बिहार लोकभवन (राजभवन) में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया था. इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दोनों डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा समेत कई मंत्री और अधिकारी शामिल हुए. समारोह को खास और गरिमामय बनाने के लिए प्रशासन की ओर से पहले से ही सभी जरूरी तैयारियां कर ली गई थीं.

शपथ ग्रहण से पहले की तैयारियां
नए राज्यपाल के शपथ ग्रहण को लेकर प्रशासन ने लोक भवन में सुरक्षा और प्रोटोकॉल की पूरी व्यवस्था की थी. कार्यक्रम को व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए अधिकारियों ने कई स्तरों पर तैयारियां कीं.

दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
नए राज्यपाल Syed Ata Hasnain 12 मार्च को ही पटना पहुंच गए थे. उनके आगमन पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया. बिहार विधानसभा के अध्यक्ष Prem Kumar ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया. इसके साथ ही बिहार सरकार की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया. राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति को बिहार के प्रशासन और राजनीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. उनके लंबे सैन्य अनुभव को देखते हुए माना जा रहा है कि वे अपने अनुभव का उपयोग राज्य के विकास और प्रशासनिक कामकाज को मजबूत बनाने में कर सकते हैं.

कौन हैं सैयद अता हसनैन
Syed Ata Hasnain भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल हैं. उन्होंने करीब 40 वर्षों तक सेना में सेवा दी है. इस दौरान उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील इलाकों में काम किया. उनका सैन्य करियर काफी प्रभावशाली माना जाता है. सेना में रहते हुए उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं और अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दीं.

कश्मीर में अहम भूमिका
अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने Jammu and Kashmir में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. वर्ष 2012 से 2014 के बीच वे श्रीनगर स्थित Chinar Corps (15 Corps) के कमांडर रहे. इस दौरान उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए. उनके नेतृत्व को सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जाता है.

युवाओं के लिए पहल
कश्मीर में रहते हुए उन्होंने केवल सुरक्षा पर ही नहीं बल्कि स्थानीय लोगों का भरोसा जीतने पर भी ध्यान दिया. उन्होंने “हार्ट्स एंड माइंड्स” यानी लोगों के दिल और भरोसे को जीतने की नीति को बढ़ावा दिया. इस नीति का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना था. इस सोच के तहत शिक्षा, खेल और रोजगार से जुड़े कई कार्यक्रम शुरू किए गए. इन पहलों का मकसद यह था कि कश्मीर के युवा सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ें और समाज के विकास में अपनी भूमिका निभाएं.

रिटायरमेंट के बाद भी सक्रिय
सेना से रिटायर होने के बाद भी Syed Ata Hasnain सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे. उन्हें National Disaster Management Authority (एनडीएमए) का सदस्य बनाया गया था. इस संस्था का काम देश में आपदा प्रबंधन से जुड़ी नीतियों और योजनाओं को तैयार करना और उन्हें लागू करना है.

रह चुके हैं यूनिवर्सिटी के चांसलर
सैयद अता हसनैन University of Kashmir के चांसलर के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं. शिक्षा और नीति निर्माण के क्षेत्र में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है. अब बिहार के राज्यपाल के रूप में उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे अपने अनुभव और नेतृत्व क्षमता के आधार पर राज्य के प्रशासनिक और सामाजिक विकास में अहम भूमिका निभाएंगे.