मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के साथ ही नीतीश कुमार से छिन जाएंगी ये शक्तियां

24 नवंबर को नीतीश कुमार ने बहुमत वाली सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और कल उससे कहीं ज्यादा बहुमत वाली सरकार को वे छोड़ देंगे. मंगलवार को नीतीश कुमार मुख्मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे और उनके नाम के आगे भूतपूर्व लग जाएग. उसके बाद वे राज्यसभा सदस्य के तौर पर अपनी आगे की राजनीति करेंगे. पिछले 20 साल से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इर्द गिर्द राजनीति कर रहे लोगों के लिए कल मंगलवार का दिन बड़ा ही भावुक रहने वाला है. मंगलवार को दोपहर बाद 12:30 बजे जनता दल यूनाइटेड विधायक दल की बैठक होगी. दोपहर बाद 2 बजे अटल सभागार में भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल की बैठक होगी. उसके बाद शाम को 5 बजे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी, जिनमें नए मुख्यमंत्री के चेहरे पर मुहर लगाई जाएगी. आइए, जानते हैं कि मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद नीतीश कुमार के प्रोटोकॉल में क्या अंतर आने वाला है?

सुरक्षा प्रोटोकॉल
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद सबसे बड़ा अंतर सुरक्षा को लेकर आने वाला है. हालांकि उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और कद को देखते हुए उच्च स्तरीय प्रोटोकॉल उन्हें मिलता रहेगा. मुख्यमंत्री रहते नीतीश कुमार को अभी तक बिहार विशेष सुरक्षा अधिनियम, 2000 के तहत स्पेशल सुरक्षा कवच यानी एसएसजी मिला हुआ था. पद से हटने के बाद एसएसजी का स्पेशल कवर हट जाएगा. हाल ही में गृह विभाग ने उन्हें जेड प्लस सिक्योरिटी दी है.

आवास प्रोटोकॉल
मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार अभी 1, अणे मार्ग पर रहते हैं. पद छोड़ने के साथ ही उन्हें इस मुख्यमंत्री निवास को छोड़ना होगा, क्योंकि नए मुख्यमंत्री इस आवास में रहेंगे. नीतीश कुमार के लिए 7, सर्कुलर रोड का बंगला अलॉट किया गया है. पद से हटने के बाद यह उनका स्थायी पता होगा. साथ ही, दिल्ली में उन्हें 6, कामराज लेन का बंगला अलॉट किया जा सकता है.

राज्यसभा सदस्य का प्रोटोकॉल
10 अप्रैल, 2026 को नीतीश कुमार ने बतौर राज्यसभा सदस्य शपथ ले ली है. इसके साथ ही उनके प्रोटोकॉल में सांसद वाली सुविधाएं भी जुड़ जाएंगी. संसद सत्र के दौरान दिल्ली में रहने और यात्रा के लिए डिप्लोमेटिक पासपोर्ट या संसद सदस्य का पास मिलेगा. केंद्र सरकार के किसी कार्यक्रम में प्रोटोकॉल के हिसाब से उनका स्थान अब पूर्व मुख्यमंत्री और संसद सदस्य के हिसाब से वरीयता क्रम से तय किया जाएगा.

पूर्व मुख्यमंत्री का प्रोटोकॉल
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों को नियमानुसार आजीवन मेडिकल खर्च की सुविधा मिलती है. इसके अलावा निजी सचिव और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का एक तय कोटा उनके साथ रह सकता है. साथ ही, सरकारी गाड़ी और ड्राइवर की सुविधा भी उन्हें मिलती रहेगी. अगर सुरक्षा कारणों से जरूरत पड़ी तो उन्हें बुलेटप्रूफ वाहन भी उपलब्ध कराया जा सकता है.

अंतिम मुहर लगाने की ताकत खत्म
मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद नीतीश कुमार की सचिवालय की फाइलों पर अंतिम मुहर लगाने की ताकत खत्म हो जाएगी. वे ​नीतिगत फैसलों में खुद को शामिल नहीं कर सकते, बल्कि एक सांसद, वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री के नाते बस सुझाव दे सकते हैं. मुख्यमंत्री या सरकार के लिए उनके सुझावों को मानना बाध्यकारी नहीं है. हालांकि गठबंधन की सरकार में ऐसा मानना सरकार के लिए लाजिमी हो जाता है.