Silver Price Today Update: अमेरिका की तरफ से ईरान पर बमबारी रोके जाने के बाद सोने-चांदी की कीमत में तेजी देखी जा रही है. विदेशी मुद्रा के मुकाबले डॉलर कमजोर होने और जियो-पॉलिटिकल टेंशन कम होने से सोना फिर से ऊपर चढ़ने लगा है. इससे पहले सोने के दाम में जून तिमाही के दौरान बड़ी गिरावट देखी गई थी. पिछले दिनों इंटरनेशनल मार्केट में सोना गिरकर 4000 डॉलर प्रति औंस से नीचे पहुंच गया था. लेकिन आज क्रूड ऑयल में नरमी आने के बाद इसमें फिर से तेजी देखी जा रही है. सोमवार सुबह कॉमेक्स (COMEX Gold) पर सोना 39 डॉलर की तेजी के साथ 4,110 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. चांदी के दाम में भी तेजी देखी जा रही है और यह चढ़कर 60 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई.
पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान शुक्रवार को सोने-चांदी के दाम में तेजी के साथ बंद हुए थे. आज बुलियन मार्केट में भी इसमें तेजी देखी गई थी. IBJA के अनुसार घरेलू बाजार में शुक्रवार को 24 कैरेट वाला सोना चढ़कर 143781 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था. जून तिमाही में रिकॉर्ड लेवल तक टूटने के बाद सोने के दाम में फिर से तेजी देखी जा रही है. चांदी का दाम भी शुक्रवार को चढ़कर 222721 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ. आज सुबह से ही इंटरनेशनल मार्केट में तेजी देखी जा रही है. इसके बाद सोमवार सुबह घरेलू बाजार में तेजी आने का आसार है.
जनवरी के बाद सोने और चांदी में भारी गिरावट
सोने के दाम गिरने के बाद पिछले दिनों निवेशकों ने पैसा निकालना शुरू कर दिया था. जनवरी 2026 में रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचने वाला गोल्ड इन दिनों करीब 25 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है. फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून 2026) में सोना 12 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया था. चांदी जनवरी 2026 में चढ़कर 117 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई थी. लेकिन अब यह गिरकर 60 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेंड कर रही है. इसी तरह जनवरी में 1.90 लाख रुपये का हाई लेवल टच करने वाला सोना टूटकर आज 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया.
सोने के दाम में गिरावट का क्या है कारण?
ग्लोबल लेवल पर कीमती सोने और चांदी दोनों के ही दाम में गिरावट के दो प्रमुख कारण हैं. पहला ईरान जंग को लेकर दुनियाभर में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की खबरें आती हैं तो निवेशक सोने में प्रॉफिट बुकिंग कर अपना पैसा निकाल लेते हैं. दूसरा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख में आया बदलाव है. फेडरल रिजर्व की तरफ से अपनी नीतिगत बैठक में इशारा दिया गया कि आने वाले समय में ब्याज दर में इजाफा किया जा सकता है.