Indian economy : भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी खबर देखने को मिली है. मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की GDP ने रफ्तार पकड़ ली है. GDP में रिकॉर्ड तोड़ 8.2% की ग्रोथ देखने को मिली है. ये छह तिमाहियों में सबसे तेज ग्रोथ है, जिसकी वजह मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज आउटपुट है. ब्लूमबर्ग का अनुमान 7.4% था.
नॉमिनल GDP 8.7% बढ़ी
GDP डेटा के मुताबिक, कम महंगाई ने नॉमिनल और रियल ग्रोथ रेट के बीच के अंतर को कम कर दिया. नॉमिनल GDP 8.7% बढ़ी, जबकि पिछले साल इसी समय में ये 8.3% थी। ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA), जिसे आउटपुट की वैल्यू में से इंटरमीडिएट गुड्स और रॉ मटेरियल की वैल्यू घटाकर कैलकुलेट किया जाता है. अनुमानित 7.3% की तुलना में 8.1% बढ़ी है.
GDP के प्रमुख सेक्टरों की परफॉरमेंस
प्राइमरी सेक्टर: 3.1%
सेकेंडरी सेक्टर (8.1%)
मैन्युफैक्चरिंग: 9.1%
कंस्ट्रक्शन: 7.2%
टर्शियरी सेक्टर: 9.2%
कृषि से जुड़े सेक्टर में 3.5% बढ़ोतरी देखने को मिली है. जबकि पिछले वर्ष ये ग्रोथ 4.1% थी। खनन (माइनिंग) सेक्टर की ग्रोथ नेगेटिव ही रही है. मैन्युफैक्चरिंग 2.2% से उछलकर 9.1% पर ग्रोथ हुई है, जबकि कंस्ट्रक्शन 8.4% से घटकर 7.2% रह गया है.
निवेश और खपत में उछाल
प्राइवेट फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PFCE) (भारत की अर्थव्यवस्था का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा चलाता है ) Q2 में 7.9% बढ़ा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में ये ग्रोथ 6.4% थी. सरकारी खर्च (Government Expenditure) 2.7% घटा है, जबकि पिछले वर्ष ये 4.3% बढ़ा था. प्राइवेट इन्वेस्टमेंट, जिसे ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (GFCF) से मापा जाता है, 7.3% बढ़ा, ये पिछले वर्ष के 6.7% से अधिक है.